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गवाह कोर्ट नहीं पहुंचा तो दरोगा बाबू की खैर नहीं, रांची SSP ने दिया अल्टीमेटम

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द फॉलोअप डेस्क 
रांची पुलिस अब आपराधिक मामलों में गवाही नहीं देने वाले गवाहों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर रही है। गवाहों की अनुपस्थिति की वजह से अगर अपराधी बरी होते हैं तो ऐसी स्थिति में संबंधित इलाके के थानेदार और केस आईओ पर कार्रवाई होगी। एसएसपी ने पांच से दस साल से लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए उन गवाहों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया, जिनकी गवाही अभी तक दर्ज नहीं हो सकी है। ऐसीपी ने लंबित मामलों की समीक्षा  बैठक के दौरान कई कांडों के गवाह अब तक कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इसका फायदा अपराधियों को मिल रहा है। गवाही नहीं होने की वजह से वे केस से बारी हो जा रहे हैं। जेल से छूटने के बाद फिर आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। इसी वजह से गवाही कराने की जिम्मेवारी थानेदारों को दी गई है, ताकि अपराधी जेल से बाहर नहीं निकल सके। सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश है कि वे समन की तामिल में तेजी लाएं। संबंधित गवाहों की उपस्थिति समय पर न्यायालय में सुनिश्चित करें। एसएसपी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब को रोकना प्राथमिकता है। पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। बैठक में निर्देशित किया कि प्रत्येक मामले की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि न्यायिक कार्यवाही सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।जारी निर्देश के अनुसार, अब संबंधित थाना प्रभारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि केस से जुड़े सभी गवाह समय पर न्यायालय में उपस्थित हों। इसके लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से निगरानी करनी होगी और जरूरत पड़ने पर गवाहों से संपर्क कर उन्हें कोर्ट तक लाने की व्यवस्था करनी होगी। एसएसपी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गवाहों की अनुपस्थिति के कारण कोई आरोपी जेल से बाहर निकलता है या उसे जमानत मिल जाती है, तो संबंधित थानेदार और केस आईओ के अधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें विभागीय कार्रवाई से लेकर अन्य दंडात्मक कदम भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस प्रशासन का मानना है कि गवाहों की समय पर उपस्थिति से न्याय प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और अपराधियों को सजा दिलाने में तेजी आएगी। इससे लोगों का कानून व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ेगा। एसएसपी ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर पुराने मामलों का निष्पादन किया जाएगा। इसके लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसमें लंबित मामलों की समीक्षा कर गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

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