नई दिल्ली:
National News: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में करीब 30 साल पहले खत्म की गई लांस नायक और नायक की रैंक फिर से लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य जवानों को समय पर पदोन्नति के अवसर देना और सेना से सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों के लिए सीआरपीएफ में सेवा के नए रास्ते खोलना है। प्रस्ताव लागू होने पर कांस्टेबलों को हेड कांस्टेबल बनने से पहले पदोन्नति के दो अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।

सीआरपीएफ मुख्यालय ने मांगी जवानों की राय
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सीआरपीएफ मुख्यालय ने देशभर में स्थित अपनी फील्ड इकाइयों को दो दिनों के भीतर सैनिक सम्मेलन या हितधारकों की बैठक आयोजित कर जवानों की राय लेने का निर्देश दिया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे जवानों की शिकायतों को दूर करना और उनका मनोबल बढ़ाना है।

1997 में खत्म कर दी गई थीं दोनों रैंक
गृह मंत्रालय के आदेश के बाद वर्ष 1997 में सीआरपीएफ से लांस नायक और नायक की रैंक समाप्त कर दी गई थी। इन रैंकों को कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल के पदों में समाहित कर दिया गया था। हालांकि, सेना में आज भी लांस नायक और नायक की रैंक मौजूद हैं।
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अग्निवीरों के लिए खुलेंगे नए अवसर
सीआरपीएफ में इन रैंकों को दोबारा लागू करने के पीछे एक उद्देश्य सेना से सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सेवा को आकर्षक बनाना भी है। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीर चार साल की सेवा पूरी करने के बाद निर्धारित पात्रता और भर्ती नियमों के अनुसार सीआरपीएफ सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल होने के अवसर तलाश सकते हैं। अग्निवीरों का पहला बैच वर्ष 2026 के अंत में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त होना शुरू होगा।
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फिलहाल सीनियर कांस्टेबल की अस्थायी व्यवस्था
वर्तमान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में कांस्टेबलों के लिए एक अस्थायी व्यवस्था के तहत वर्दी पर सीनियर कांस्टेबल का रैंक लगाया जाता है। यह आधिकारिक रूप से स्वीकृत रैंक नहीं है, लेकिन इसे लांस नायक के समकक्ष माना जाता है। वहीं, नायक की रैंक के लिए फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
समयबद्ध पदोन्नति पर दिया गया जोर
एक्स-पैरामिलिट्री पर्सनल एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि प्रस्तावित योजना का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब जवानों को समयबद्ध तरीके से पदोन्नति दी जाएगी। ऐसा नहीं होने पर यह पूरी कवायद बेकार साबित हो सकती है। वहीं, सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ कमांडेंट ने कहा कि सेना की इन दोनों रैंकों को दोबारा लागू करना केवल दिखावे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके साथ ही बटालियन में अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है।
22 से 25 साल तक करना पड़ता है पहले प्रमोशन का इंतजार
पदानुक्रम के अनुसार, सीआरपीएफ में कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने वाले जवान को सामान्य व्यवस्था में पांच साल बाद लांस नायक, दस साल बाद नायक और लगभग बीस साल बाद हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति मिलने का प्रावधान बताया जाता है। हालांकि, वर्तमान में करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले सीआरपीएफ में पदोन्नति को लेकर लंबे समय से ठहराव की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, एक कांस्टेबल को पहले प्रमोशन के लिए औसतन 22 से 25 साल तक इंतजार करना पड़ता है। लंबे समय तक एक ही रैंक पर बने रहने से जवानों में असंतोष पैदा होने की आशंका रहती है।
बटालियन की संरचना का भी रखना होगा ध्यान
सीआरपीएफ और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में पहले सेना की इन्फैंट्री बटालियनों की तर्ज पर लांस नायक और नायक की रैंक मौजूद थीं। एक वरिष्ठ कमांडेंट के अनुसार, एक बटालियन में एक हजार से अधिक पुरुष और महिला कर्मी हो सकते हैं तथा 20 से ज्यादा अधीनस्थ अधिकारी भी होते हैं। ऐसे में नई पदोन्नति व्यवस्था तैयार करते समय बटालियन की संगठनात्मक संरचना, अनुशासन और कार्यक्षमता को ध्यान में रखना जरूरी होगा।