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पाकिस्‍तान यात्रा-9: कराची के रत्‍नेश्‍वर मंदिर में कोई गैर-हिंदू नहीं जा सकता

हिंदी के वरिष्‍ठ लेखक असगर वजाहत 2011 में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के जन्म शताब्दी समारोह में शिरकत करने पाकिस्तान गए थे।

कैसे याद न आएं दुष्‍यंत- मत कहो, आकाश में कुहरा घना है

'हो गयी है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए   

हिन्दी में शोधपत्र लिखनेवाले पहले शोधार्थी थे रामकथा के मर्मज्ञ फादर कामिल बुल्के

'रामकथा और विकास पर शोध प्रबंध लिखकर उन्हों ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से डी.फिल. की डिग्री ली थी।

पाकिस्‍तान यात्रा-8: मुल्तान में परत-दर-परत छिपा हुआ है महाभारत कालीन इतिहास का ख़ज़ाना

''वरिष्‍ठ लेखक असग़र वजाहत- विभाजन पूर्व मुल्तान हिन्दुओं और जैनियों का प्रमुख केन्द्र था। मैंने जिज्ञासावश काज़मी साहब से मुल्तान के हिन्दुओं के बारे में जानकारी चाही। 

एक दिहाड़ी मज़दूर के छठवीं फेल लड़के की करोड़ों का मालिक बनने की कहानी

मैं कक्षा 6 में फेल हो गया और एक खेत में पापा के साथ दिहाड़ी मजदूर बनने के लिए स्कूल छोड़ने का फैसला किया-पीसी मुस्‍तफ़ा

राही जयंती: मुझे काबा नहीं सिर्फ गंगौली का अपना घर याद आता है......

''आप एक ही दंगे में अपना वतन पाकिस्तान छोड़कर भाग आए और जो हज़ार दंगों के बाद भी अपना वतन, अपनी बोली-भाषा नहीं छोड़ना चाहते उन्हें आप समझाएँगे कि देशभक्ति क्या होती है।

संवैधानिक मूल्यों के प्रति चंबल में जागरूकता की मशाल बनीं झारखंड की सुनीता

'''हौसले और परिश्रम के बल पर सामाजिक बदलाव की कहानी

गर्व सच्चे इश्क़ पर है, हुनर की दावेदारी नहीं- अमृता प्रीतम ने लेखन के विषय में कहा था

'एक बार अमृता ने इमरोज से पूछा था कि क्या तुमने woman with mind'  paint की है..? उत्तर इमरोज के पास भी नहीं था

थम नहीं रही तालिबान की दरिंदगी, अब लोकगायक फवाद अंद्राबी को मार डाला

कुछ दिनों पहले कॉमेडियन नजर मोहम्मद की हत्या तालिबानियों ने कर दी थी।

सीरिया में बदलता अफ़ग़ानिस्तान अशांत रहेगा, इसे उसकी नियति मान लीजिये

खलीली अल रहमान हक्कानी वो शख्स है, जिसके सिर पर अमरीका ने 9 फरवरी 2011 को पचास लाख डॉलर का इनाम रखा था।

जन्माष्टमी: कोविड से छटपटाते शहर में गुलाब-बेला की खुशबू के बीच जागी उम्मीद 

'बैजू प्रसाद प्रजापति जैसे कलाकार बनारस में अपनी कला को जिंदा रखने के बावजूद सरल और मुस्कुराते इंसान हैं

जन्माष्टमी: भारत में नबियों के बाद मुसलमानों के सबसे आदरणीय श्रीकृष्ण-नज़ीर मलिक

''श्री कृष्ण जी की शान में मुसलमानों ने जितना लिखा, उतना दुनियां के अन्य किसी मजहब के महापुरुष के बारे में नहीं लिखा।

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