द फॉलोअप डेस्क:
Nana Patekar: नाना पाटेकर (Nana Patekar) अपनी दमदार अदाकारी और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे। पर्दे पर गैंगस्टर से लेकर सख्त मिजाज पुलिस अधिकारी तक के किरदार निभाने वाले नाना की जिंदगी का एक पहलू ऐसा भी था, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उनका रिश्ता मुंबई (Mumbai) के कुख्यात गैंगस्टर (Gangster) मनोहर अर्जुन सुर्वे उर्फ मन्या सुर्वे से था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मन्या सुर्वे (Manya Surve) नाना पाटेकर के मामा के बेटे यानी उनके ममेरे भाई थे। नाना ने एक पुराने इंटरव्यू (Interview) में भी अपने ननिहाल के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले रिश्तेदारों का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि बचपन में ऐसे लोगों को करीब से देखने की वजह से उन्हें अपराधियों के व्यवहार और उनके तौर-तरीकों को समझने का अनुभव मिला। हालांकि, उनके पारिवारिक माहौल से जुड़ी इन बातों को लेकर कई दावे सामने आए हैं, इसलिए हर किस्से को स्थापित तथ्य मानना सही नहीं होगा।

मां के फैसले ने बदली जिंदगी
नाना पाटेकर के जीवन में उनकी मां की भूमिका बेहद अहम रही। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी मां नहीं चाहती थीं कि उनके बच्चे रिश्तेदारों के आपराधिक माहौल से प्रभावित हों। इसी वजह से वह बच्चों को मुंबई से दूर महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा ले गईं, जहां नाना का बचपन भी बीता। नाना ने ‘कौन बनेगा करोड़पति 16’ में अमिताभ बच्चन से बातचीत के दौरान भी अपने जीवन के अनुभव साझा किए थे। इसी दौरान उनके उस पुराने बयान की चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर वह अभिनेता नहीं बनते, तो संभव है कि अंडरवर्ल्ड की दुनिया में चले जाते। उनके इस बयान को उनकी जिंदगी के अनुभवों और बचपन में देखे गए माहौल के संदर्भ में समझना चाहिए। यह कहना सही नहीं होगा कि उनका भविष्य तय था, लेकिन उनके जीवन की कहानी बताती है कि परिवार का मार्गदर्शन और अपने लिए चुना गया रास्ता किसी व्यक्ति की जिंदगी में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।

मन्या सुर्वे का खौफनाक अंत
उधर, मन्या सुर्वे का नाम मुंबई के अंडरवर्ल्ड के इतिहास में एक कुख्यात गैंगस्टर के रूप में दर्ज है। 11 जनवरी 1982 को वडाला इलाके में मुंबई पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। इस घटना को मुंबई पुलिस की शुरुआती दर्ज मुठभेड़ों में गिना जाता है। इसी घटना से प्रेरित होकर 2013 में जॉन अब्राहम अभिनीत फिल्म ‘शूटआउट एट वडाला’ भी बनाई गई थी। मन्या सुर्वे की अपराध की दुनिया और नाना पाटेकर के अभिनय करियर के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं होता, लेकिन नाना के पुराने बयान उनके बचपन के अनुभवों की एक अलग तस्वीर जरूर पेश करते हैं। आखिरकार, नाना ने अपनी पहचान अपराध की दुनिया से नहीं, बल्कि अभिनय से बनाई और ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’ तथा ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई।