द फॉलोअप डेस्क
राजद नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए राज्य की NDA सरकार पर करारा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सूबे के सरकारी अस्पतालों में संचालित जीविका ‘दीदी की रसोई’ में गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण नवजात शिशुओं को जन्म देने वाली प्रसूता महिलाओं को समय पर भोजन नहीं मिल पा रहा है।

अब प्रसव के बाद पौष्टिक आहार भी नसीब नहीं
तेजस्वी ने सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे करने वाले लोग आज चुनाव बीतते ही जच्चा-बच्चा को उनके हाल पर मरने के लिए बेसहारा छोड़ चुके हैं। सरकार की नीतियां और चुनावी वादों को आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव के दिन ढाई करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये नगद बांटकर लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई गईं। लेकिन आज, जब प्रसव के बाद महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य और रिकवरी के लिए सबसे ज्यादा पौष्टिक भोजन की आवश्यकता है, तब उन्हें भूखा रहना पड़ रहा है। खुद को ‘महिला हितैषी’ बताने वाली एनडीए सरकार का असली चेहरा सामने आ चुका है और उनके सारे दावे पूरी तरह से खोखले और झूठे साबित हुए हैं।

बिहार की 65% महिलाएं खून की कमी से जूझ रहीं है
तेजस्वी यादव ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और महिलाओं के स्वास्थ्य स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि बिहार में पिछले 21 वर्षों से जारी एनडीए सरकार के निकम्मेपन की वजह से आज राज्य की 65% महिलाएं एनीमिया यानी खून की कमी से जूझ रही हैं। राजद नेता ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों और विकास पर रोजाना बड़ी-बड़ी बातें करने वाले और सरकार में बैठे बड़बोले नेता आज इस भयावह स्थिति पर पूरी तरह से चुप क्यों हैं?