द फॉलोअप डेस्क:
पटना में सोमवार को अलग-अलग मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों के सड़क पर उतरने से कई इलाकों में हलचल बढ़ गयी। गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से छात्र, किसान, मजदूर और विभिन्न जन संगठनों से जुड़े लोगों ने आक्रोश मार्च निकाला, जो जेपी गोलंबर की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों की मांगों में बाढ़-सूखा का स्थायी समाधान, बाढ़ पीड़ितों को राहत, रोजगार, स्कीम वर्कर्स को स्थायी करने और मजदूरों के लिए न्यूनतम मानदेय समेत कई मुद्दे शामिल रहे। प्रदर्शन में AISF, CPI, AIKF और अन्य वाम संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल हुए। जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्कामुक्की की स्थिति बनी।
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वाटर कैनन के बाद डाकबंगला पर कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पानी की बौछार के बीच कुछ प्रदर्शनकारी राहत मिलने की बात कहते हुए नजर आए। वहीं, पटना सदर SDM कृतिका मिश्रा ने प्रदर्शनकारियों से शांत रहने और धैर्य बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत हुई है और उन्हें उचित मंच पर बातचीत के लिए ले जाया जाएगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे की तरफ बढ़े, जहां पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। डाकबंगला समेत आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग कर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ने पर महिला पुलिसकर्मियों ने उनकी मदद की।

BUHS छात्रों ने परीक्षा परिणाम की समीक्षा की मांग उठाई
इसी बीच बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज यानी BUHS से जुड़े छात्र भी अपनी परीक्षा और परिणाम को लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। छात्रों ने परीक्षा परिणाम की समीक्षा समेत अपनी शिकायतों के समाधान की मांग की। कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने का दावा किया है, लेकिन 95 प्रतिशत छात्रों के फेल होने के इस दावे की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं हुई है। वहीं, BUHS की आधिकारिक वेबसाइट पर सितंबर में कई परीक्षाओं से जुड़े कार्यक्रम और सूचनाएं जारी की गयी हैं। ऐसे में छात्रों की ओर से उठाए गए परीक्षा संबंधी आरोप और विश्वविद्यालय की आधिकारिक स्थिति अलग-अलग हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड से ही होगी।