द फॉलोअप डेस्क
बिहार में स्वास्थय व्यवस्था एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गई है। पटना स्थित PMCH में डॉक्टरों और लैब कर्मियों की घोर कमी होने की जानकारी निकल कर सामने आई है। बताते चलें कि डॉक्टरों और लैब कर्मियों की कमी के कारण PMCH में अब से सप्ताह में केवल 3 दिन ही सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को खून की जांच की जाएगी। वहीं, इससे मरीजों को इलाज में देरी और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर दूर-दराज से आने वाले ग्रामिण लोगो के लिए यह स्थित और भी ज्यादा परेशानी भरा रहन वाला है। स्वास्थय विभाग का ये बहुत ही शर्मनाक स्थित है। जानकारी के अनुसार, तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते रोजाना जांच कर पाना संभव नहीं हो रहा था, जिसके कारण स्वास्थय विभाग की ओर से ये स्टैंड लिया गया है। यह रिपोर्ट बताती है कि स्वास्थय विभाग कितना ईमानदारी से अपना काम कर रही है। जहां एक ओर भारत विश्वगुरू बनने की बात कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि बुनियादी स्वास्थय सुविधाओं की कमी आज भी यथावत बनी हुई है।

वहीं, मरीजों और परिजनों का कहना है कि सीमित दिनों में जांच होने से लंबी कतारें लग रही हैं। खासकर ग्रामीण व दूर-दराज जिलों से आने वाले मरीजों को दोबारा अस्पताल आना पड़ रहा है, जिससे समय और आर्थिक खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। कई मामलों में जांच रिपोर्ट में देरी से उपचार शुरू होने में भी विलंब हो रहा है। हालांकि अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीजों की बढ़ती संख्या और उपलब्ध संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण जांच की समय-सारिणी सीमित करनी पड़ी है। PMCH में पुनर्निर्माण के बाद बेड क्षमता और सुविधाओं में विस्तार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन मानव संसाधन की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है। बहरहाल, इस संबंध में राजेंद्र सर्जिकल वार्ड स्थित पैथोलाजी विभाग में सूचना चस्पा कर मरीजों और उनके स्वजन को अवगत कराया गया है। हालांकि, PMCH अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने मामले से अन्यभिज्ञता जताई है। बताते चलें कि कहा कि डॉ. राजीव कुमार शनिवार को समीक्षा करेंगे। सूचना के अनुसार एफटी3, एफटी4, टी3, टी4, टीएसएच, विटामिन-डी, विटामिन-बी12, एंटी-सीसीपी, प्रोलैक्टिन तथा पीएसए जैसी जरूरी जांच अब निर्धारित तीन दिनों में ही होंगी।
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ऐसे में तय दिनों के अलावा आने वाले मरीजों को अगली तिथि तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बताया जाता है कि पैथोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की कमी है, फैकल्टी की कमी है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और कई मामले अभी उनकी संज्ञान में आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच व्यवस्था को लेकर मिली जानकारी के आधार पर स्थिति की समीक्षा की जाएगी और समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्वीकार किया कि कई विभागों में मानव संसाधन की कमी है, जिसे दूर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, मरीजों को उम्मीद है कि जांच सेवाएं जल्द ही सामान्य होंगी, ताकि आवश्यक परीक्षण समय पर हो सकें और इलाज में देरी न हो।