बिहार
बिहार के किशनगंज जिले के बिशनपुर थाना क्षेत्र में हुई रिजवान की हत्या के मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी डेजी को गिरफ्तार किया है। 4 जुलाई की सुबह रिजवान की लाश उसके ही घर में मिली थी। पुलिस द्वारा की गई 12 घंटे की गहन पूछताछ में डेजी ने हत्या और उसकी साजिश से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। डेजी ने स्वीकार किया है कि उसने अपने दोस्त अनवर के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया। लोग कहते हैं कि मेरे छह बॉयफ्रेंड हैं, लेकिन सच तो यह है कि मुझे खुद याद नहीं कि इन 33 सालों में कितने लोग मेरी जिंदगी में आए; मैं छह नहीं, बल्कि कई मर्दों के जंजाल में फंसी हूं। जहां तक रही मेरे पति रिजवान की बात है, तो शादी के बाद वह मेरे साथ 13 दिन भी ठीक से नहीं रहा और मुझे बिशनपुर के गांव में अकेला छोड़कर कुवैत चला गया। उसके जाने के बाद कभी उसके दोस्त, कभी पहचान वाले, तो कभी दूसरे लोग किसी न किसी बहाने से मेरे घर आने लगे। शुरुआत में तो मैं लोक-लाज और बदनामी के डर से सब कुछ खामोशी से सहती रही, लेकिन वक्त के साथ हालात इस कदर बदलते गए कि धीरे-धीरे मुझे इन गैर मर्दों की आदत सी हो गई।

शादी के बाद अकेलापन और बदलती जिंदगी
डेजी ने पुलिस को बताया कि सितंबर 2013 में उसकी शादी रिजवान से हुई थी। शादी के महज 18 दिन बाद ही रिजवान अपनी नौकरी बचाने के लिए उसे गांव में अकेला छोड़कर कुवैत चला गया। इसके बाद रिजवान हर दो साल में एक बार छुट्टी पर घर आता और फिर वापस लौट जाता। इस 13 साल के सफर में डेजी के दो बच्चे जिनमें 12 साल का बेटा और 8 साल की बेटी भी हुई, लेकिन उसका अधिकांश समय अकेलेपन में ही बीता। लोक-लाज के डर से शुरुआत में सब सहने के बाद, धीरे-धीरे डेजी की जिंदगी में अन्य पुरुषों का आना-जाना शुरू हो गया।
आफताब का आना और अनवर से दोबारा नजदीकी
साल 2016 में आफताब नाम का एक युवक रिजवान का दोस्त बनकर डेजी के घर आने लगा और धीरे-धीरे उनकी बातचीत बढ़ गई। इसके बाद साल 2019 में डेजी को पता चला कि रिजवान ने कुवैत में दूसरी शादी कर ली है, जिससे वह पूरी तरह टूट गई। इस मोड़ पर उसने अपने पुराने दोस्त और बचपन के पसंद अनवर से संपर्क किया। अनवर ने उसका साथ दिया और पिछले पांच सालों से वह डेजी के हर सुख-दुख में शामिल रहा, यहां तक कि वह उसके बच्चों को अपनाने के लिए भी तैयार था।
रिजवान की वतन वापसी और राज खुलने का डर
फिर18 जून 2026 को रिजवान अचानक कुवैत से हमेशा के लिए भारत लौट आया क्योंकि उसकी कंपनी बंद हो चुकी थी। रिजवान के भारत में ही रुकने के फैसले से डेजी घबरा गई, क्योंकि उसे डर था कि उसके सारे राज खुल जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, अनवर भी रिजवान के वापस न जाने की बात से बेहद खफा था। 3 जुलाई की शाम जब डेजी ने अनवर को फोन पर यह बताया कि रिजवान अब हमेशा यहीं रहेगा, तो अनवर ने नाराजगी जताई। इसके बाद डेजी ने उसे रात में पूरी तैयारी के साथ आने को कहा।
3 जुलाई की रात रॉड से हमला और हत्या
3 जुलाई की रात करीब 1 बजे अनवर लोहे की रॉड लेकर डेजी के घर पहुंचा। डेजी ने चुपचाप दरवाजा खोल दिया। अनवर सीधे उसके कमरे में गया जहां रिजवान सो रहा था और उसने लोहे की रॉड से रिजवान के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे रिजवान की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के वक्त डेजी वहीं मौजूद थी। हत्या के बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से डेजी ने रिजवान के दोनों मोबाइल फोन अनवर को दे दिए, जिसे अनवर ने बांसवाड़ी में छिपा दिया और हत्या में इस्तेमाल किए गए रॉड को एक गड्ढे में फेंक दिया।
पुलिस की तफ्तीश और आरोपियों की गिरफ्तारी
सुबह होने पर डेजी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए चोरी के दौरान हत्या की झूठी कहानी गढ़ी। हालांकि, SDPO खुसरू सिराज के नेतृत्व में पहुंची पुलिस, FSL टीम और डॉग स्क्वॉयड को घटनास्थल की परिस्थितियों और बयानों में विरोधाभास मिला। कड़ाई से की गई पूछताछ में डेजी टूट गई और उसने सब सच उगल दिया। तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने अनवर को भी गिरफ्तार कर लिया। अनवर की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल रॉड और दोनों मोबाइल बरामद कर लिए हैं। दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।