द फॉलोअप डेस्क:
कैमूर जिले में बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के तीसरे चरण (TRE-3) के तहत नियुक्त विद्यालय अध्यापक अविनाश कुमार मौर्य की नियुक्ति को लेकर शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नुआंव प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय महिला मोरथ में कार्यरत शिक्षक से नियुक्ति के समय जमा किए गए प्रमाणपत्रों की जानकारी मांगी गई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शंभू कुमार सिंह ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया है कि संबंधित शिक्षक के सभी आवश्यक दस्तावेज 24 घंटे के भीतर जिला शिक्षा कार्यालय में उपलब्ध कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्देश का पालन नहीं करने या जांच में सहयोग नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें बर्खास्तगी भी शामिल है।
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यूपी के बलिया का निवासी होने का आरोप
शिक्षक की नियुक्ति को लेकर सेवा संवाद-समाधान पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अविनाश कुमार मौर्य उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के निवासी हैं, इसके बावजूद उन्होंने बिहार के जाति, निवास और नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों के आधार पर बीपीएससी टीआरई-3 के माध्यम से नियुक्ति प्राप्त की। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अभी इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल शिकायत के आधार पर संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। प्रमाणपत्रों के सत्यापन और नियुक्ति के समय जमा किए गए कागजात का मिलान होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्रधानाध्यापक को इन दस्तावेजों को जमा कराने का निर्देश
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना ने प्रधानाध्यापक को शिक्षक के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र और आधार कार्ड की प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा है। विभागीय निर्देश के अनुसार, सभी कागजात निर्धारित समय सीमा के भीतर जिला शिक्षा कार्यालय में जमा कराने हैं। इसके लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए दस्तावेज भर्ती प्रक्रिया में दर्ज विवरण से मेल खाते हैं या नहीं।
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दस्तावेजों के सत्यापन के बाद होगी आगे की कार्रवाई
अब मामले में शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट अहम होगी। प्रमाणपत्रों की वैधता और नियुक्ति के दौरान दी गई जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। यदि जांच में दस्तावेजों में गंभीर अनियमितता या गलत जानकारी सामने आती है, तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। वहीं, प्रमाणपत्र सही पाए जाने पर शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल शिक्षक की नियुक्ति को लेकर लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं और बर्खास्तगी को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।