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जदयू में संगठनात्मक बदलाव : प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए उमेश कुशवाहा का नामांकन, महासचिव अमरेंद्र दास सीएम आवास के बाहर बैठे आमरण अनशन पर 

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पटना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जाने की खबर के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां पार्टी संगठन में नए समीकरण बनने की चर्चा है, वहीं कार्यकर्ताओं के बीच भी बेचैनी और विरोध खुलकर सामने आने लगा है।
इसी बीच जदयू में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। शुक्रवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन की अंतिम तिथि शुक्रवार थी और पार्टी सूत्रों के अनुसार अब तक किसी अन्य नेता ने इस पद के लिए पर्चा दाखिल नहीं किया है। ऐसे में उमेश कुशवाहा का तीसरी बार निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है।


उमेश कुशवाहा के नामांकन में कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रस्तावक की भूमिका निभाई। इनमें सांसद रामनाथ ठाकुर, बिहार सरकार की मंत्री लेसी सिंह, मंत्री श्रवण कुमार समेत कई विधायक शामिल रहे। नामांकन के बाद कुशवाहा ने कहा कि शुक्रवार शाम 5 बजे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा की जाएगी।
इस बीच नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिली। पटना में जदयू कार्यालय के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया और कार्यालय में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। शुक्रवार को जदयू के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र दास त्रिलोक मुख्यमंत्री आवास के बाहर आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने हाथ में बैनर लेकर नीतीश कुमार से बिहार न छोड़ने की अपील की। उनका कहना था कि वे अपनी जान दे देंगे, लेकिन मुख्यमंत्री को दिल्ली नहीं जाने देंगे।


वहीं कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में लोगों ने नीतीश कुमार के चेहरे पर भरोसा कर वोट दिया है, इसलिए उन्हें जनता और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उनका कहना था कि बिहार नीतीश कुमार का परिवार है और उन्हें राज्य की जनता को छोड़कर दिल्ली नहीं जाना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नए समीकरण बनने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों की नजरें जदयू की आगामी बैठकों पर टिकी हुई हैं।

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