बिहार/डेस्क
बिहार वालों को गर्मी से फ़िलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली है। लगातार बादझते तापमान ने लोगों का गर्मी से जीना मुहाल कर दिया है। इसी बीच 25 मई से नौतपा की शुरुआत होने जा रही है जो 2 जून तक रहेगा। माना जाता है कि जब सूर्य ज्येष्ठ महीने में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तब शुरू होने वाले 9 दिनों को नौतपा कहा जाता है। इस दौरान सूर्य की तपिश सबसे ज्यादा महसूस होती है और गर्मी अपने चरम पर पहुंच जाती है।
मौसम वौज्ञानिक की माने तो इस समय सूर्य की किरणें उत्तर और मध्य भारत पर सीधी पड़ती हैं। इससे मैदानी इलाकों में एयर प्रेशर कम हो जाता है और लू चलने लगती है। नौतपा को मानसून का गर्भकाल भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान जितनी ज्यादा गर्मी पड़ती है, उतना ही बेहतर मानसून होने की संभावना रहती है, क्योंकि तेज गर्मी से समुद्रों से ज्यादा वाष्पीकरण होता है।

कई जिलों में तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस पहुंचने की संभावना
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार बिहार में नौतपा का असर थोड़ा अलग देखने को मिल सकता है। सुपर अल नीनो और बदलते जलवायु चक्रों का असर मौसम पर साफ दिखाई दे रहा है। अनुमान है कि पटना, गया, बक्सर, भागलपुर समेत दक्षिण और मध्य बिहार के कई जिलों में तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच सकता है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने यह भी संभावना जताई है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसम तंत्र और मानसून की जल्दी दस्तक के कारण बिहार के कुछ हिस्सों में गरज-चमक तेज हवाएं और हल्की बारिश हो सकती है। मौसम की इस स्थिति को स्थानीय भाषा में 'नौतपा का गलना' भी कहा जाता है।
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो नौतपा के दौरान तेज धूप फसलों और खेतों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि इससे मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीट और बैक्टीरिया खत्म होते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक बिना जरूरी काम के घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है।