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बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 8 जिलों में हाई अलर्ट; कई इलाकों में डूबी फसलें

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द फॉलोअप डेस्क
बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। गंगा, गंडक, पुनपुन और दरधा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से पानी नए इलाकों में फैल रहा है। कहीं खेत और फसलें जलमग्न हो गई हैं, तो कहीं सड़कें पानी में डूबने से आवागमन बाधित हो गया है। कई जगह तेज कटाव के कारण रेलवे लाइन और पुलों पर भी खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ का असर अब केवल घरों और खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़क, पुल, पंचायत और रेलवे लाइन तक दिखाई देने लगा है। स्थिति को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में हाई अलर्ट जारी किया है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।


पटना में गंगा खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर
पटना में बाढ़ की स्थिति पर सबसे ज्यादा नजर गंगा के जलस्तर पर बनी हुई है। दीघा में गंगा खतरे के निशान से 1.17 मीटर, गांधी घाट पर 1.67 मीटर और हाथीदह में 1.32 मीटर ऊपर बह रही है। पूर्वानुमान के अनुसार हाथीदह में शुक्रवार दोपहर तक गंगा के उच्चतम जलस्तर की सीमा पार करने की संभावना है। वहीं पुनपुन नदी श्रीपालपुर में खतरे के निशान से 2.29 मीटर और दरधा नदी कोल्हाचक में 3.07 मीटर ऊपर पहुंच चुकी है। भागलपुर में भी पिछले 24 घंटे के दौरान गंगा का जलस्तर करीब 15 सेंटीमीटर बढ़ा है। जलस्तर बढ़ने के बाद नाथनगर, नवगछिया और पीरपैंती के दियारा इलाकों में दोबारा पानी फैल गया है। खेतों में लगी फसल और पशुओं के लिए रखा चारा भी पानी में डूब गया है।


खगड़िया से राघोपुर तक बाढ़ और कटाव का खतरा
खगड़िया में स्थिति और गंभीर बनी हुई है, क्योंकि जिले में कई नदियां लाल निशान से ऊपर बह रही हैं। यहां गंगा 1.01 मीटर, कोसी 1.19 मीटर, बागमती 1.20 मीटर और बूढ़ी गंडक 44 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राघोपुर में भी बाढ़ के साथ तेज कटाव ने चिंता बढ़ा दी है। मार्जिनल बांध के दो से तीन किलोमीटर के दायरे में रेलवे लाइन के आसपास भीषण कटाव और मिट्टी धंसने की स्थिति बनी हुई है। गंगा की मुख्य धारा रेलवे लाइन के बेहद करीब पहुंच गई है। राघोपुर की लगभग सभी पंचायतें बाढ़ से प्रभावित हैं और करीब 20 पंचायतों का मुख्य सड़क से संपर्क टूट चुका है। मुंगेर में भी 24 घंटे के दौरान गंगा का जलस्तर करीब 36 सेंटीमीटर बढ़ा है। वहीं मधेपुरा के आलमनगर और चौसा में करीब एक लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित बताई जा रही है। सहरसा के करीब छह गांवों में पानी घुस गया है, जबकि समस्तीपुर में गंगा का पानी बढ़ने से करीब 24 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।


कई जिलों में सड़क और डायवर्सन पानी में बहे
पश्चिम चंपारण में योगापट्टी-छोटा चौमुखा से सिसवा मंगलपुर जाने वाली मुख्य सड़क पर दो से तीन फीट पानी बह रहा है, जिससे इस मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है। बांका के कुरमा गांव में ईदगाह के पीछे मिर्चनी नदी का तेज बहाव भी परेशानी बढ़ा रहा है। वहीं मुंगेर के बरसंडा गांव के पास निर्माणाधीन पुल के लिए बनाया गया डायवर्सन भी तेज बहाव में बह गया है। इन घटनाओं से साफ है कि बिहार के कई जिलों में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है और बुनियादी ढांचे पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित एवं जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।