भोजपुर/बिहार
भोजपुर के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की एनकाउंटर के बाद हुई मौत का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने अपनी ही सरकार की पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाया है। साथ ही इसको लोकतंत्र को शर्मसार करने वाली घटना बताया। फेसबुक पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि जब भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो इसके बावजूद पुलिस ने उसे गोली मारकर हत्या क्यों की। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मामले में संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
48 घंटे में दोषियों को जेल भेजे सरकार
अश्विनी चौबे ने मुख्यमंत्री सम्राट से भी मामले में 48 घंटे के भीतर दोषी पुलिसकर्मियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि भरत ने आत्मसमर्पण किया था, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए था, न कि गोली मार दी जाती। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। साथ ही इससे सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है। उन्होंने युवाओं को अपराध की राह से बचाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई की भी मांग की।

एनकाउंटर मामले में थानाध्यक्ष समेत चार पुलिसकर्मी निलंबित
इधर, भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस विभाग ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दो सब-इंस्पेक्टर और एक सिपाही को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि घटना से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठे। जांच के दौरान संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाए जाने पर चारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।