आरा/बिहार
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला दिनोंदिन और पेंचीदा होते जा रहा है। मामले में स्थानीय लोगों ने पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए कई खुलासे किए। ग्रामीणों का कहना है कि भरत भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता था इसलिए उसे जगदीशपुर एसडीएम ने जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद उसने अपने बचाव में पिस्टल खरीदी थी। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के समय थाना अध्यक्ष उसके दरवाजे से कुछ ही दूरी पर खड़े थे। अगर वह अपराधी होता, तो पुलिस पर गोली चला देता, लेकिन वह शांति से बात कर रहा था।

परिजन और ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
गंगा कटाव से उजड़े लोगों के हक की लड़ाई लड़ने वाला भरत के एनकाउंटर के बाद परिजन और ग्रामीणों ने पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके साथ ही ग्रामीणों ने बताया कि शाहपुर थाना क्षेत्र के जवईनिया गांव में पिछले साल गंगा नदी के कटाव से आधे से अधिक घर बह गए थे। सैकड़ों लोगों की आशियाना उजड़ने के बाद वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए थे। इस दौरान बिहार सरकार ने विस्थापितों के लिए पुनर्वास और सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये देने की घोषणा की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इस राशि में भारी गड़बड़ियां की जा रही थी। उच्च पदों पर बैठे अधिकारी प्रभावित परिवारों तक सहायता राशि नहीं पहुंचने देना चाहते थे। इसके बाद भरत तिवारी सामने आकर प्रभावित परिवारों के लिए आवाज उठाना शुरु किया था। इसे देखकर अधिकारियों ने उसे कई बार चुप कराने की भी कोशिश की, लेकिन भरत का कहना था कि जिसके लिए सहायता राशि आवंटित की जा रही है, उस तक सुरक्षित पहुंचना चाहिए।

भरत नहीं चाहता था कि प्रभावितों का पैसा अधिकारी खाए
ग्रामीणों ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि भरत नहीं चाहता था कि प्रभावितों का पैसा अधिकारी खाए। इसलिए जगदीशपुर एसडीएम ने जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके बाद उसने अपने बचाव में पिस्टल खरीदी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने की वजह से ही उन्हें साजिश के तहत फर्जी एनकाउंटर में मारा गया और मुठभेड़ का नाम दिया गया। उनका कहना है कि भरत की वजह से गांव में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचीं हैं और कटाव रोकने के काम में तेजी आई।
इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से निष्पक्ष जांच करने का ऐलान किया है। अब देखना होगा कि क्या फैसला आता है।