भोजपुर/बिहार
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने बड़ा कदम उठाते हुए मुख्य सचिव, DGP और भोजपुर के SP को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इससे पहले इस मामले को दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाते हुए किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में बताया गया था कि मृतक युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। इसे देखते हुए एनकाउंटर की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

5 पुलिसकर्मियों को निलंबित
इधर, बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार इस कार्रवाई में हुई चूक को स्वीकार किया है। लॉ एंड ऑर्डर एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि 16 जून को पुलिस टीम आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान स्थिति को सही ढंग से संभालने में विफल रही। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित थाना प्रभारी, दो दरोगा, एक एएसआई और एक सिपाही सहित कुल 5 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

साइंस लैब समेत आधुनिक तकनीकों की मदद ली जाएगी
राज्य सरकार ने मामले की जांच शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी को सौंप दी है। पुलिस के अनुसार अब जांच वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी, जिसमें फॉरेंसिक साइंस लैब समेत आधुनिक तकनीकों की मदद ली जाएगी। इस बीच एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने भी पारदर्शी जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मामले में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे आगे की कार्रवाई तय होगी।