logo

नीतीश ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन, रामनवमी से पहले बन सकती है भाजपा नेतृत्व वाली सरकार, JDU के दो डिप्टी CM समेत 32 मंत्रियों के शपथ की तैयारी; स्पीकर और गृह विभाग पर अटका मामला

NITISH2222.jpg

द फॉलोअप डेस्क
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही लगभग तय माना जा रहा है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्य को नया मुख्यमंत्री मिलेगा। हालांकि फिलहाल न तो भारतीय जनता पार्टी और न ही जदयू इस प्रक्रिया में जल्दबाजी के मूड में हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 16 मार्च तक चलेगी, जबकि नए सांसदों को 9 अप्रैल के बाद शपथ दिलाई जाएगी। यानी अभी लगभग एक महीने का समय है। इस दौरान दोनों पार्टियां पहले अपने-अपने विधायक दल की बैठक करेंगी और नेता का चुनाव करेंगी। इसके बाद एनडीए विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे और नया नेता सरकार बनाने का दावा पेश करेगा।  बीजेपी सूत्रों के मुताबिक राम नवमी (26 मार्च) तक नई सरकार का गठन हो सकता है। तीन महीने पहले नीतीश कुमार ने 26 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी, लेकिन अब बनने वाली सरकार में मंत्रियों की संख्या बढ़कर 32 तक हो सकती है। संभावित फॉर्मूले के मुताबिक 14 मंत्री बीजेपी, 14 जदयू, 2 Lok Janshakti Party (Ram Vilas) और Hindustani Awam Morcha तथा Rashtriya Lok Morcha से एक-एक मंत्री हो सकते हैं। दोनों प्रमुख दलों की ओर से कुछ नए चेहरों को भी मौका मिलने की संभावना है।


स्पीकर और गृह विभाग को लेकर खींचतान
जदयू के एक प्रदेश स्तर के नेता के मुताबिक पार्टी ने विधानसभा स्पीकर और गृह विभाग पर दावा किया है। फिलहाल मुख्यमंत्री पद जदयू के पास है, जबकि स्पीकर बीजेपी के पास है। वहीं डिप्टी सीएम Samrat Choudhary के पास गृह विभाग भी है। जदयू का तर्क है कि जब मुख्यमंत्री उनका होगा तो इन पदों पर भी उन्हें मौका मिलना चाहिए। हालांकि बीजेपी इन दोनों अहम पदों को छोड़ने के पक्ष में नहीं है। 2005 के बाद पहली बार गृह विभाग बीजेपी के पास आया है और पार्टी इसे बनाए रखना चाहती है। साथ ही स्पीकर का पद भी सरकार की स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।


CM पद की दौड़ में ये दो नाम सबसे आगे
1. सम्राट चौधरी
डिप्टी सीएम Samrat Choudhary मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। वे कोइरी समाज से आते हैं, जबकि नीतीश कुमार कुर्मी समाज से हैं। बिहार की राजनीति में इस सामाजिक समीकरण को ‘लव-कुश’ कहा जाता है। राज्य में कोइरी और कुर्मी समुदाय की कुल आबादी लगभग 7 प्रतिशत के आसपास मानी जाती है। बीजेपी अगर सम्राट चौधरी को आगे करती है तो वह नीतीश कुमार के पारंपरिक वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की रणनीति अपना सकती है। बीजेपी लंबे समय से गैर-यादव ओबीसी वर्ग को मजबूत करने की कोशिश कर रही है और इस रणनीति में सम्राट चौधरी फिट बैठते हैं। सम्राट चौधरी के पास संगठन और सरकार दोनों का अनुभव है। वे राबड़ी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री रहे थे और वर्तमान में दो बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं। उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली भी बीजेपी की रणनीति के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि उनके सामने एक चुनौती यह भी है कि वे मूल रूप से बीजेपी के नेता नहीं रहे हैं। इससे पहले वे Rashtriya Janata Dal और जदयू में भी रह चुके हैं। इसी वजह से कुछ पुराने भाजपाई नेताओं ने उन्हें ‘आयातित’ नेता भी कहा था।
2. विजय सिन्हा
डिप्टी सीएम Vijay Kumar Sinha भी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा माना जाता है। उन्हें संघ की पृष्ठभूमि से आने वाला मूल भाजपाई नेता माना जाता है और प्रधानमंत्री Narendra Modi तथा गृह मंत्री Amit Shah के करीबियों में गिना जाता है। विजय सिन्हा 2010 से लगातार लखीसराय विधानसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस दौरान वे मंत्री, विधानसभा स्पीकर और नेता प्रतिपक्ष जैसी अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं। वर्तमान में वे भी डिप्टी सीएम हैं और एक सख्त प्रशासक की छवि रखते हैं। हालांकि उनके खिलाफ एक तर्क यह दिया जाता है कि वे भूमिहार समाज से आते हैं, जो बिहार में अपेक्षाकृत छोटी आबादी वाला सवर्ण वर्ग है। पिछले तीन दशकों से राज्य की राजनीति में पिछड़ा वर्ग का प्रभाव ज्यादा रहा है, इसलिए बीजेपी इस सामाजिक समीकरण को लेकर सावधानी बरत सकती है।


EBC चेहरे पर भी हो सकता है दांव
बीजेपी कई राज्यों में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर चौंकाने वाले फैसले ले चुकी है। इसलिए यह भी चर्चा है कि पार्टी किसी अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के नेता को मुख्यमंत्री बनाकर नया सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर सकती है। बताया जाता है कि हाल ही में पटना दौरे के दौरान अमित शाह ने कुछ EBC विधायकों से मुलाकात भी की थी।
JDU से डिप्टी CM के संभावित नाम
अगर बीजेपी मुख्यमंत्री बनाती है तो मौजूदा फॉर्मूले के तहत जदयू के दो डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। इस पद के लिए दो नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है।
1. निशांत कुमार
चर्चा यह भी है कि नीतीश कुमार सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाकर अपने बेटे Nishant Kumar को आगे बढ़ा सकते हैं। निशांत अब तक राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव के बाद से उनकी सक्रियता बढ़ी है। ऐसे में पार्टी और सामाजिक समीकरण के बीच संतुलन बनाने के लिए उन्हें अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
2. विजय चौधरी
जदयू के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Chaudhary को भी डिप्टी सीएम पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। उन्हें जदयू में नीतीश कुमार का ‘नंबर दो’ नेता कहा जाता है और वे पार्टी की कोर कमेटी के अहम सदस्य हैं। विजय चौधरी अपनी शांत और संतुलित राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। वे वित्त, शिक्षा, ग्रामीण कार्य, जल संसाधन और संसदीय कार्य जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा वे विधानसभा स्पीकर भी रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं।