द फॉलोअप डेस्क
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन आज दोनों सदनों की संयुक्त कार्यवाही राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण के साथ शुरू हुई। राज्यपाल ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा पेश करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में भविष्य के रोडमैप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के हर नागरिक तक न्याय और विकास की गारंटी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है और आगामी बजट में शिक्षा सुधारों को प्राथमिकता दी गई है।
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान ही सदन में उस वक्त गहमागहमी बढ़ गई जब विपक्ष के विधायकों ने 'नीट' (NEET) परीक्षार्थी की मौत का मुद्दा उठा दिया। विपक्षी विधायक ने राज्यपाल का ध्यान आकर्षित करते हुए सीधा सवाल किया, "महोदय, नीट छात्र को न्याय कब मिलेगा?" विपक्ष ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे सरकार को इस मामले में उचित जवाब देने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए निर्देशित करें। विपक्ष ने तर्क दिया कि यह केवल एक छात्र का मामला नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की साख से जुड़ा सवाल है।.jpeg)
विपक्ष के तीखे सवालों के बीच राज्यपाल ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने संकेत दिया कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसे संबंधित अधिकारियों तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है और भविष्य में शैक्षणिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन विपक्ष के तेवरों से साफ हो गया कि यह मुद्दा सत्र के दौरान लगातार गर्माता रहेगा।
सत्र के पहले दिन हुई इस बहस ने संकेत दे दिए हैं कि 19 दिनों तक चलने वाला यह बजट सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक ओर जहां सरकार कल पेश होने वाले बजट के जरिए विकास का नया खाका खींचने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने युवाओं और छात्रों के अधिकारों के मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है। अब सभी की निगाहें सरकार के उस औपचारिक उत्तर पर टिकी हैं, जो विपक्ष के इन गंभीर सवालों के जवाब में सदन के पटल पर रखा जाएगा।