द फॉलोअप डेस्क:
बच्चे के जन्म के बाद जन्म प्रमाण पत्र और किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी होता है। जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल स्कूल में एडमिशन, सरकारी योजनाओं और उम्र व जन्मस्थान से जुड़े कई कामों में किया जाता है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र बैंक, संपत्ति और दूसरे कानूनी या प्रशासनिक कामों में जरूरी दस्तावेज होता है। जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन 'Registration of Births and Deaths Act, 1969' के तहत किया जाता है। इस कानून में 2023 में संशोधन किया गया था। संशोधन के बाद जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं, खासकर उन मामलों में जहां रजिस्ट्रेशन में देरी हो जाती है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह संशोधित कानून 1 अक्टूबर 2023 से लागू है।
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एक साल से ज्यादा देरी पर क्या होगा?
अगर किसी व्यक्ति की जन्म या मृत्यु की जानकारी एक साल से ज्यादा समय बाद दी जाती है, तो अब इसके रजिस्ट्रेशन के लिए संबंधित अधिकारी के आदेश की जरूरत होती है। संशोधित कानून के तहत ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM)या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM)द्वारा अधिकृत एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आदेश जारी कर सकते हैं। इसके साथ निर्धारित प्रक्रिया और फीस का पालन करना होता है। इससे पहले एक साल से ज्यादा देरी वाले मामलों में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था थी। संशोधन के बाद इस स्तर पर प्राधिकरण को बदलकर DM, SDM या उनके द्वारा अधिकृत Executive Magistrate किया गया है।

दो साल की देरी पर क्या है नियम?
उपलब्ध केंद्रीय प्रावधानों के अनुसार एक साल से ज्यादा देरी वाले रजिस्ट्रेशन के लिए अब सीधे DM/SDM या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश की व्यवस्था है। इसलिए दो साल से ज्यादा देरी के लिए अलग से हर मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के पास जाने की बात को मौजूदा केंद्रीय संशोधित प्रावधान के रूप में नहीं बताया जाना चाहिए।
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समय पर रजिस्ट्रेशन कराना क्यों जरूरी?
जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन जितनी जल्दी कराया जाए, उतना आसान रहता है। देरी होने पर अतिरिक्त दस्तावेज, सत्यापन, फीस और संबंधित अधिकारी की अनुमति जैसी प्रक्रिया लागू हो सकती है। सरकार ने जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और प्रमाण पत्रों की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया है। संशोधित कानून के तहत जन्म प्रमाण पत्र को 1 अक्टूबर 2023 या उसके बाद जन्मे व्यक्ति के जन्म की तारीख और स्थान के प्रमाण के लिए एकल दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल करने का प्रावधान भी किया गया है। इसलिए अगर परिवार में बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है, तो उसका रजिस्ट्रेशन समय पर कराना जरूरी है। देरी होने की स्थिति में संबंधित राज्य के नियमों और निर्धारित अधिकारी के स्तर की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
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