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राज्यपाल को दुबारा भेजेंगे 1932 का विधेयक, बोले मंत्री जगरनाथ महतो

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रांचीः 
खतियानी जोहार यात्रा के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका लगा है। विशेष सत्र बुलाकर 1932 आधारित स्थनीय नीति पास कराकर राज्यपाल के पास भेजा गया था और किया गया था कि इसे केंद्र के पास भेजा जाए। लेकिन राज्यपाल की तरफ से इस विधेयक को वापस कर दिया गया है। इस मामले पर जब द फॉलोअप ने राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो बात की तो उन्होंने कहा कि ये महामहीम के अधिकार क्षेत्र की बात है बिल वापस करने की। लेकिन विधानसभा का भी अपना कुछ अधिकार है, सिर्फ यही एक बिल हमने नहीं भेजा है उनके पास। कैबिनेट का  जो अधिकार है उसके तहत हम फिर से प्रस्ताव भेजेंगे। अगर बिल में कुछ त्रुटि है तो उसको संशोधन करके फिर से राज्यपाल के पास भेजेंगे। 27 प्रतिशत आरक्षण का बिल भी उनके पास गया है, सरना कोड का बिल भी हमने भेजा है। जितना भी बिल होता है वह हम राज्यपाल के पास भेजते हैं, अगर इसमें कुछ गलती होती है तो सुधार कर हम फिर भेजते हैं। हम इस बार यह भी देख लेंगे कि दूसरे राज्य में इसके लिए क्या प्रावधान है। 100 फिसदी आरक्षण की बात पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में क्या हुआ है, उत्तराखंड में क्या हुआ है। अगर वहां 100 प्रतिशत आरक्षण है तो झारखंड में क्यों नहीं। 

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नहीं होगा कोई विवाद 
जब हमने उनसे पूछा कि राजभवन की तरफ से कहा गया है कि इस विधेयक  को लेकर विवाद पैदा हो जाएगा बाद में। इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि इसे लेकर कोई विवाद पैदा नहीं होगा क्योंकि यह सर्वसम्मति से पास हुआ था। थर्ड और फोर्थ ग्रेड पर हमारा पूर्ण अधिकार है। हमारे अलग राज्य होने का क्या संदेश जनता के बीच जाएगा। 1932 के प्रति मैं काफी भावुक हो जाता हूं। मैं राज्यपाल से न्याय मांग रहा हूं क्योंकि ये हमारा अधिकार है। ये पिछड़ा राज्य है। संदन का काम लाना है बिल लाना । हम  महामहिम से यही अनुरोध करेंगे कि ये बिल केंद्र के पास भेज दें। लेकिन अब जब उन्होंने वापस कर दिया है तो इसपर समीक्षा होगी किस आधार पर इसे वापस किया गया है। अगर 9वीं सूची में भेजने का प्रावधान नहीं रहता तो हम यह राज्यपाल के पास भेजते ही नहीं। हमने अपने चुनावी वादा पूरा किया है हमने जनता के बीच रहकर काम किया है। 1985 लाए थे रघुवर दास तो क्या वह पास हो गया। वह सदन में आया था क्या। वह कैबिनेट में ले आए वह पास हो गया था क्या। हर राजनीतिक दल पॉलिटिक्स करते हैं लेकिन हमने पॉलिटिक्स नहीं किया। हमने जनभावना को ध्यान में रखकर यह विधेयक लाया। बीजेपी के कथनी और करनी में बहुत फर्क है। सदन में जनता को दिखाने के लिए उन्होंने दिखावा किया था, हम जब राज्यपाल के पास गये थे तो वह हमारे साथ नहीं गये थे ऐसा क्यों। हमने जब उनसे कहा कि आप तो ऐसा कह रहे हैं कि यह विधेयक राज्यपाल केंद्र के पास भेज दे वहां संसद में ही यह तय हो जाएगा। लेकिन आपको क्या लगता है यह संसद में भी पास होगा क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह ने चाईबासा में कहा है कि 1932 के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बांटने का काम कर रहे हैं। इसपर मंत्री जगरनाथ ने कहा कि यह बाद की बात है । जो नियम है यदि 9वीं अनुसूची में भेजने का अधिकार नहीं रहता तो ये विधेयक राज्यपाल के पास जाता ही नहीं।