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झारखंड में जो सरकार चाहेगी वही राज्य में लागू होगा, गर्वनर जो चाहेंगे वह नहीं- CM हेमंत सोरेन

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डेस्क:
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) की खतियानी जोहार यात्रा (Khatiani Johar Tour) आज सरायकेला में थी। यहां बिरसा मुंडा स्टेडियम में सीएम ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान सीएम ने सबसे पहले सबको खतियानी जोहार किया। सभी को धन्यवाद किया। कहा कि यह पहले जितनी भी सरकार आई सभी ने जेब भरने का क काम किया। इन लोगों ने राज्य को लूटने का सबसे बड़ा अड्डा बनाया है। इस दौरान सीएम ने 1932 आधारित स्थानीय नीति पर खुलकर बयान दिया है। कहा, खतियान की फ़ाइल लौटाई गई है। ये नयी बात नहीं है। जहां भी गैर-भाजपा सरकारें वहां संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर उन्हें परेशान करने का कार्य किया जा रहा है। यह झारखंड है। यहां के आदिवासियों और मूलवासियों ने सरकार बनाई है और जो वो चाहेंगे वही होगा। सीएम ने साफ तौर से कहा कि यह झारखंड है यहां जो सरकार चाहेगी वहीं राज्य में लागू होगा। गर्वनर जो चाहेंगे वह नहीं। यहां आने से पहले मैं राज्यपाल के साथ था लेकिन मुझे पता नहीं था कि विधेयक को लेकर यह फैसला लिया गया है। मैं अखबार नहीं पढ़ता। क्योंकि, मैं लोगों के साथ रहता हूं, वही मेरे लिए खबर है। 


आंगनवाड़ी सेविका,सहायिका,पारा शिक्षक सरकारी कर्मचारी को रोजगार दिया
 सीएम ने कहा कि अभी हमने विकास का काम शुरू किया है। हमको जहां तक याद है संघर्ष यात्रा के दौरान हमें और इसी मैदान में यात्रा को निकालना पड़ा। इसलिए निकालना पड़ा क्योंकि राज्य अलग होने के बाद इस राज्य का वातावरण बदलने लगा। चारो चारों तरफ मारपीट,लूटपाट। बड़े पैमाने पर लोग यहां हमारे अधिकार को लूटने की तैयारी कर रहे थे। यहां के कर्मचारी,आंगनवाड़ी सेविका,सहायिका,पारा शिक्षक सरकारी कर्मचारी उनको भी अधिकार नहीं मिल रहा था। महीनों तक आंगनबाड़ी सेविका अपने बाल बच्चों को लेकर सड़क पर रहती थी। जो पारा शिक्षक जिसको स्कूल में रहने का काम था। वर्षों तक यह लोग 12 महीना 11 महीना तक आंदोलन करते थे। और बाकी 1 महीना घर पर रहता थे। आज देखिए वही पारा शिक्षक उनकी समस्या का समाधान हुआ। आज यह लोग 11 महीने स्कूल में रहते है। बाकि के एक महीना घर में रहते है। आंगनबाड़ी सेविका सहायिका हमारे सरकारी कर्मचारी कभी पदाधिकारी गांव जाते थे। 
वृद्धा,विधवा और विकलांग पेंशन का कार्ड बनवाया
वृद्धा पेंशन बनाने के लिए लोगों का जूता छिल गया। दलाली के पीछे घूमते थे। कार्यालय के चक्कर लगाते लगाते। कितनी बार लोगों का पैसा दलाल खा गया। लेकिन वृद्धा पेंशन का कार्ड नहीं बना। विधवा पेंशन का कार्ड नहीं बना,विकलांग पेंशन का कार्ड नहीं बना। और आज देखिए हमने कानून बनाया कि जो भी 60 साल का बूढ़ा होगा उसको कोई जगह भटकने का जरूरत नहीं है वह वृद्धा पेंशन का भागीदार हो जाएगा। आज ऐसा कोई बुढ़ा नहीं है जो वृद्धा पेंशन नहीं उठा रहा है। कोई ऐसी विधवा नहीं है जिससे विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है कोई विकलांग नहीं है जो बिना पेंशन का है। यह देश का पहला राज्य जहां सभी बुजुर्गों को पेंशन देने का काम होता है। 

पहला सीएम जो बूढ़ा पहाड़ गया
सीएम ने कहा कि मोटा देखकर डरो नहीं और पतला देखकर लड़ो नहीं। झारखंड को कमजोर मत समझो। मैं कल-परसों बूढ़ा पहाड़ गया था। बूढ़ा पहाड़ यहां पर एक ऐसा जगह पिछले 20 साल से अधिक कोई नहीं गया था। कोई पदाधिकारी नहीं,कोई मुखिया नहीं गया,कोई नेता नहीं गया। पूरा आतंकियों का साम्राज्य था। हम दिन भर उस बूढ़ा पहाड़ में रहे। गांव में पत्तल में खाना खाया। बहुत तकलीफ हुआ यह है कि वह बुढ़ा पहाड़ ऐसे पंचायत आता है जहां से आंदोलनकारी निलांबर-पितांबर का भी गांव वहीं पर है। हम बोले हाय रे हाय क्या कर दिया इस राज्य को.. बिरसा मुंडा का गांव सिद्धों कान्हू सरायकेला का क्षेत्रों का विकास कहां है। आज के दिन में भी वही दर्द वहीं तकलीफ। अब आप देखेगे कि आने वाले 6 महीने के अंदर उन दोनों पंचायतों का सूरत बदलने का काम शुरू कर दिया जाएग। किसी को भी नक्सल बंदूक उठाने का जरूरत नहीं पड़ेगा। दरवाजे दरवाजे हम लोग सूचना दे रहे हैं योजना का लाभ उठाओ। आज गरीबों के लिए योजना किसानों के लिए योजना हमारे पढ़ने वाले नौजवानों के लिए योजना है। रोजगार सृजन को लेकर कार्यक्रम चला रहे हैं।

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झारखंड बना रहा कानून तो यूपी-बिहार के लोगों के पेट में दर्द हो रहा
 अभी हमने जो नियोजन नीति बनाया उस नियोजन नीति से 100% तक हमारा झारखंडी आदिवासी मूलवासी लोगों को नौकरी होता। लेकिन बड़ा चतुर है हमारा हमारा विपक्ष उसके साथ हमारे झारखंडी दलाल लोग भी उसके साथ हैं और हमारे इस कानून को कोर्ट में चुनौती दे दिया गया। चुनौती देने वाला 20 आदमी था। एक आदमी को चेहरा के रूप में यहां का झारखंडी को रखा। 20 में से 19 हमने जांच कराई तो सब यूपी-बिहार का लोग निकला। कितना अजीब बात है नौकरी का कानून बना रहा है झारखंड और पेट दर्द हो रहा है यूपी बिहार के लोगों को हो रहा है। 

9 लाख बच्चों को सावित्रीबाई फूले योजना से जोड़ने का टारगेट
बहुत सारे लोग अपना गरीबी की वजह से बच्चों का पढ़ाई छुड़वा देता है। गरीबी के वजह से लड़की की पहले शादी करके हटा देते है। आप उसका चिंता मत करो सावित्रीबाई फूले योजना से इस राज्य में 9 लाख बच्चों को जोड़ने का हमारा टारगेट है। 6 लाख बच्चों को जोड़ चुके हैं। अभी दो-तीन लाख लोग और बाकी लोगों को भी जोड़ लेंगे। अब लोगों के पढ़ने के रास्ते में पैसे का कभी कोई रुकावट,कमी नहीं आएगा यहां तक कि इंजीनियर बनाओ तभी नहीं मिलेगा नहीं तो लड़के लड़के बिना शहादत के हमें कुछ होगी। 

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यह लोग हमें बोका समझते हैं
ये कहते हैं कि जो कानून बनाया है वह नियमसंगत नहीं है। यह कितने दिन होगा हमें कबतक यह लोग बोका सोचेगा। अब यही बोका लोग ठोकेगा। पेट में गमछा बांधकर आंदोलन होता था जब भी इसे असंवैधानिक कहा जायेगा। उस वक्त तो दिशोम गुरू को देखो और गोली मार दो का आदेश दे दिया था। हेमंत सोरेन ने कहा, आदिवासी जब जब अपनी आवाज उठायेगा इन्हें पेट में दर्द होगा। कहा जा रहा है सरकार ऐसा विधेयक ना लाए जिससे विवाद पैदा हो। यहां के मूल निवासियों को नौकरी देना, अधिकार देना गलत है क्या ? इसे ये लोग असंवैधानिक कहते हैं। अभी यह शुरू हुई है अभी लड़ाई जारी रहेगी। हमने कई जंग जीता है आगे भी जंग जीतेंगे। हेमंत सोरेन ने मंच से कहा, मैं जब यहां आ रहा था तो आते- आते जानकारी ली कि सोनखंडी, काठीटांड जैसे कई जगह है जरा पता करो यहां पारा शिक्षक कहां से हैं सब बाहरी हैं। हमारे बाल बच्चे यहां नहीं है। कौन सा राज्य में अपने राज्य के लोगों के रोजगार के लिए कानून नहीं बना।
छत्तीसगढ़ के आदमी ने 5 साल राज्य को चलाया
हेमंत सोरेन ने कहा, इस राज्य को पांच साल राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी नहीं चला सके। फिर आये हमारे बड़े भाई अर्जुन मुंडा तुर्रम खान वो भी नहीं चला सके। इस राज्य राज्य को पहली बार पांच साल रघुबर दास ने चलाया जो छत्तीसगढ़ के हैं। भाजपा के लोग झारखंड के खून पर भरोसा नहीं करते।

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