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द फॉलोअप इम्पैक्ट : बेबस मां सरिता देवी की मदद के लिए बढ़े हाथ, आर्थिक और राशन सहयोग की लगी कतार

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गिरडीह 
राजधनवार विधानसभा क्षेत्र के तिसरी प्रखंड अंतर्गत सिंघो पंचायत के लक्ष्मनिया टोला निवासी सरिता देवी की दर्दभरी कहानी को 'The Followup' द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद अब मदद के हाथ आगे बढ़ने लगे हैं। तीन छोटे बच्चों के साथ टूटे हुए मिट्टी के घर में भूखे पेट रातें काटने को मजबूर इस बेबस मां की खबर सामने आने के बाद कई समाजसेवी, स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि परिवार की सहायता के लिए आगे आए हैं।

 
खबर वायरल होते ही मदद के लिए आगे आए लोग
सरिता देवी की बदहाल जिंदगी, टूटे हुए मिट्टी के घर और तीन छोटे बच्चों के साथ भूखे पेट जीवन गुजारने की मजबूरी ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। यह खबर वायरल होने के बाद क्षेत्र के कई लोगों ने आर्थिक सहयोग देने के साथ-साथ राशन सामग्री पहुंचाकर पीड़ित परिवार की मदद की। किसी ने चावल-दाल दिया, तो किसी ने बच्चों के लिए कपड़े और जरूरी सामान उपलब्ध कराया। स्थानीय समाजसेवी दामोदर कुमार यादव ने बताया कि खबर प्रकाशित होने के बाद से लोग लगातार संपर्क कर मदद करने की इच्छा जता रहे हैं। उन्होंने कहा, “मानवता अभी जिंदा है। लोगों ने जिस तरह से सहयोग किया है, उससे इस परिवार को बड़ी राहत मिली है।”

 
सरिता देवी के परिवार को अब सरकारी सुरक्षा का इंतज़ार
वहीं आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि पहले यह परिवार अक्सर भूखे पेट सोने को मजबूर था, लेकिन खबर सामने आने के बाद लोगों का ध्यान इस ओर गया और अब लगातार मदद पहुंच रही है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि फिलहाल मिली सहायता केवल अस्थायी राहत है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस परिवार को सरकारी योजनाओं से जोड़े, उनके आधार कार्ड बनवाए, राशन कार्ड उपलब्ध कराए और रहने के लिए 'प्रधानमंत्री आवास योजना' का लाभ दिलाए ताकि सरिता देवी और उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि मीडिया की आवाज मजबूती से उठे, तो समाज और प्रशासन दोनों तक पीड़ितों की तकलीफ पहुंचती है और मदद के रास्ते खुलते हैं।
 

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