जामताड़ा:
साइबर क्राइम (Cyber Crime) का गढ़ कहा जाने वाले जिले (District) को अब एक नई पहचान मिली है। जामताड़ा(Jamtara) के कर्माटांड़ की दो बेटियों लक्ष्मी कुमारी (Lakshmi Kumari) और पूर्णिमा कुमारी (Purnima Kumari) ने गरीबी, अभाव और सामाजिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए झारखंड अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम में अपनी जगह बनाई है। दोनों खिलाड़ी बीसीसीआई की अंडर-19 स्टेट (BCCI Under-19) चैंपियनशिप टी-20 (State Championship T20) सत्र 2026-27 में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी। कर्माटांड़ से निकली इन दोनों बेटियों की कहानी सिर्फ क्रिकेट में चयन (Selected) की कहानी नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने (Dream) देखने और उन्हें मेहनत के दम पर पूरा करने की कहानी है। ‘द फॉलोअप’ की टीम ने संवाददाता दीपक झा (Deepak Jha) के नेतृत्व में दोनों खिलाड़ियों के घर से लेकर क्रिकेट के मैदान तक पहुंचकर उनकी संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी को करीब से जाना।
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नाश्ते की दुकान में मिस्त्री की बेटी लक्ष्मी: पुआल के घर में चमकते मेडल
कर्माटांड़ थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव की रहने वाली लक्ष्मी कुमारी का सफर बेहद कठिनाइयों भरा रहा है। लक्ष्मी के पिता कर्माटांड़ बाजार में एक नाश्ते की दुकान में मिस्त्री का काम करते हैं और महीने में महज 12 से 13 हजार रुपये कमाते हैं। इसी सीमित आय में वे 4 बेटियों और 1 बेटे समेत पूरे परिवार का पेट पालते हैं और लक्ष्मी की पढ़ाई व क्रिकेट किट का खर्च उठाते हैं। लक्ष्मी के पिता ने भावुक होते हुए बताया कि कर्माटांड़ का नाम सुनते ही लोग साइबर अपराध को लेकर ताना मारते हैं, लेकिन उनकी बेटी ने इस पहचान को बदलने का काम किया है। लक्ष्मी खपरैल और पुआल से बने एक छोटे से घर में रहती है। उसकी मां किरण देवी ने बताया कि लक्ष्मी रोज सुबह 'मार-भात' (चावल का पानी और भात) खाकर अभ्यास के लिए निकल जाती थी और उसके बाद स्कूल जाती थी। लक्ष्मी के पुआल वाले कमरे में चारों तरफ उसके जीते हुए मेडल और सर्टिफिकेट टंगे हैं, जो उसकी कड़ी मेहनत की गवाही देते हैं।
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मुर्गा दुकान चलाने वाले की बेटी पूर्णिमा: तानों को दरकिनार कर पूरी की जिद्द
कर्माटांड़ के ही शांति नगर मोहल्ले की रहने वाली पूर्णिमा कुमारी की कहानी भी उतनी ही प्रेरणादायक है। पूर्णिमा के पिता बाजार में एक छोटी सी मुर्गा बेचने की दुकान चलाकर अपने चार बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। पूर्णिमा की मां मूर्ति देवी ने आंखों में आंसू भरकर बताया कि जब पूर्णिमा पैंट-शर्ट पहनकर खेलने जाती थी, तो समाज के लोग ताना मारते थे कि "लड़की को लड़का बना दिया है।" लेकिन मां-बाप ने समाज की परवाह न करते हुए बेटी का ढाल बनकर साथ दिया। पूर्णिमा में यह खासियत है कि जब वह कुछ ठान लेती है, तो उसे पूरा करके ही मानती है। तानों को अनसुना कर मार-भात खाकर अभ्यास करने वाली पूर्णिमा ने आज यह साबित कर दिखाया कि प्रतिभा किसी साधन की मोहताज नहीं होती।
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जगन्नाथपुर क्रिकेट अकादमी से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर
कर्माटांड़ से 6 किलोमीटर दूर स्थित जगन्नाथपुर क्रिकेट अकादमी ही वह मैदान है, जहां से लक्ष्मी और पूर्णिमा के सपनों को पंख मिले। दोनों बेटियां यहीं पसीना बहाती थीं। उनके कोच निवास मंडल और साथी खिलाड़ियों का कहना है कि दोनों बहुत ही मेहनती और अनुशासित हैं। आगामी प्रतियोगिता में ये दोनों खिलाड़ी देवघर जिला क्रिकेट संघ की तरफ से मैदान पर अपना हुनर दिखाएंगी। अभावों में पली-बढ़ीं जामताड़ा की इन दोनों बेटियों का एक ही सपना है। एक दिन भारतीय राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम (टीम इंडिया) की नीली जर्सी पहनकर पूरे देश का नाम रोशन करना।