सत्ता परिवर्तन के बाद लगा था कि अब झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर अंकुश लग जाएगा, लेकिन अबतक इसपर रोक नहीं लगा पायी है। ऐसा लगता है कि मॉब लिंचिंग का खौफ लोगों के जेहन से निकालने में वर्तमान सरकार सफल नहीं हो पा रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्तमान सरकार में मॉब लिंचिंग की तीन घटनाएं हो चुकी हैं, और इनमें सभी आदिवासी समुदाय से आते हैं।
सिमडेगा में सात आदिवासियों को पीटा गया
बता दें कि बीते 16 सितंबर को सिमडेगा में ऐसी ही एक घटना घटी। गोकशी की आशंका में सात आदिवासियों को लोगों ने पहले तो बुरी तरह पीटा। फिर उनका सिर मुंडवाया और बाद में पूरे गांव में घुमाया। सामाजिक संगठन झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से जारी
आंकड़ों के मुताबिक साल 2016 से अब तक कम-से-कम 29 मुसलमान व आदिवासी गौकशी, मांस खाने-बेचने के आरोप अथवा धार्मिक नफरत के कारण लिंचिंग व भीड़ के हिंसा के शिकार हुए हैं।
2 जुलाई को जमशेदपुर की पहली घटना
महासभा की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक हेमंत सरकार के कार्यकाल में 2 जुलाई को जमशेदपुर में पहली घटना घटी। इसमें रमेश बेसरा नाम के व्यक्ति को गोमांस खाने के शक में पीटा गया। दूसरी घटना भी इसी तारीख को दुमका में घटी। यहां भी गोमांस बेचने के आरोप में छोटेलाल टुडू और मंडल मुर्मू को भीड़ ने जमकर पीटा। तीसरी घटना 16 सितंबर को सिमडेगा में घटी। यहां राज सिंह, दीपक कुल्लू, इमानुएल टेटे, सुगद डांग, सुलीन बारला, सोसन डांग और सेम किड़ो नामक व्यक्तियों की पिटाई की गई। सभी क्रिश्चियन धर्म को माननेवाले आदिवासी युवक बताये जाते हैं।
रघुवर सरकार में मॉब लिंचिंग के 12 मामले
इससे पहले बीते 12 सितंबर को प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की
मृत्यु हुई। जानकारी के मुताबिक 17 जुलाई 2018 को पाकुड़ जिले में उनपर भीड़ ने
हमला कर दिया था, जहां उन्हें बुरी तरीके से पीटा गया। घटना के बाद उन्होंने साफ कहा था कि ये सरकार का प्रायोजित हमला है। करीबियों के मुताबिक उस घटना के बाद से उनकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी थी। इसके साथ ही पूर्व की सरकार में कुल 19 लोग मॉब लिंचिंग के शिकार हुए थे, जिसमें कुल 12 लोगों को मार दिया गया था।
मॉब लिंचिंग का चर्चित चेहरा बना था तबरेज
उल्लेखनीय है कि मॉब लिंचिंग में सबसे चर्चित सरायकेला-खरसांवा के तबरेज अंसारी का मामला सामने आया था। बीते साल 17 जून को भीड़ ने बाइक चोरी के शक में 22 वर्षीय तबरेज अंसारी को बुरी तरह पीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले में स्वास्थ्य विभाग के दो डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा हुई और स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने दोनों चिकित्सकों डॉ. शाहीद अनवर और डॉ. ओम प्रकाश केशरी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलाने की सहमति दे दी है।
प्रतिबंध के बावजूद जारी है व्यापार
झारखंड में गोमांस की खरीद बिक्री पर
प्रतिबंधित है। पिछली सरकार में ही यह कानून पास किया गया था। अपराध साबित होने पर न्यूनतम एक साल और अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है। झारखंड के अलावा यूपी, गुजरात, एमपी, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, गोवा, पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में भी गोकशी और गोमांस खरीद बिक्री पर प्रतिबंध है। हालांकि इसके बावजूद पाकड़ु, साहिबगंज सहित अन्य सीमावर्ती जिलों से लगातार गो तस्करी जारी है।
'फिर गोकशी के नाम पर मॉब लिंचिंग क्यों?'
ऐसे में सवाल ये उठता है कि गाय की खरीद-बिक्री पर जब प्रतिबंध नहीं है तो फिर गोकशी के नाम पर भीड़ की हिंसा क्यों हो रही है। वर्तमान सरकार अब तक इन घटनाओं को रोकने में विफल क्यों रही है? सिमडेगा की घटना के बाद वहां के हालात का जायजा लेने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता जेम्स हेरेंज कहते हैं कि आदिवासियों के ऊपर अत्याचार ब्राह्मणवादी सोच का नतीजा है। इसके अलावा ब्यूरोक्रेसी औऱ कट्टर धार्मिक वादी लोगों को कानून का डर नहीं है। इसलिए एक तबका इसको अंजाम देता है, दूसरा तबका उसको शाबाशी देता है। शाबाशी की बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि सिमडेगा में जब पुलिस जांच करने पहुंची, तो बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे आरोपियों शाबाशी देने लगी। जाहिर है हेमंत सोरेन ब्यूरोक्रेसी में वह मैसेज देने में अभी तक विफल रहे हैं।
अबतक पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई.
जेम्स ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार के विपक्षियों को घेरने के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं मिल रहा है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं को हेमंत सरकार को घेरने के लिए अंजाम दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक सिमडेगा मामले में कुल पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं कुल नौ लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।
गुस्से में है आदिवासी समाज
जाहिर सी बात है गोकशी कानून को लेकर हेमंत सरकार पूर्व की सरकार के फैसले में किसी तरह का छेड़छाड़ नहीं करेगी। वह बिल्कुल नहीं चाहेगी विपक्ष को बैठे-बिठाए कोई मुद्दा मिल जाए, ना ही वह आदिवासियों में यह विश्वास पैदा कर पा रही है कि आप निश्चिंत होकर रहें, ऐसे कोई आपको मॉब लिंचिंग का शिकार नहीं बना सकता है। इसको लेकर आदिवासी समाज गुस्से में है।