द फॉलोअप टीम, रांची:
पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएलएफआई) के सुप्रीमो दिनेश गोप ने आईएमए के सचिव डॉ शंभू प्रसाद सिंह से पीएलएफआई के नाम पर 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने की बात को गलत करार दिया है। उनका कहना है कि संगठन ऐसा घिनौना काम नहीं करता है। ये कोई चोर गिरोह का काम होगा। हमने कुछ व्यवसाइयों से सहयोग जरूर मांगा है।
17 नवंबर को डॉ. शंभू प्रसाद को मिली थी धमकी
बता दें कि डॉ. शंभू प्रसाद को गत 17 नवंबर एक अज्ञात नंबर से फोन आया था। फोन करनेवाले ने उनसे कहा कि तुम व्हाट्सएप मैसेज नहीं देखते हो उसे देखो। व्हाट्सएप पर तुम से कुछ मांग की गई है, उसे जल्द पूरा करो, नहीं तो जान से मार दिए जाओगे। फोन करनेवाले शख्स ने डॉ. शंभू प्रसाद से कहा कि अगर 24 घंटे के अंदर 20 लाख रुपए नहीं मिलेंगे, तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। फोन करनेवाले ने खुद को पीएलएफआई के सुप्रीमो दिनेश गोप का खास बताया। रंगदारी के कॉल और मैसेज आने के बाद डॉक्टर शंभू प्रसाद ने रांची के एसएसपी को मामले की जानकारी दी थी।
हथियार फैक्ट्री लगाने का भी खंडन किया
दिनेश गोप ने मीडिया में छपी खबर खंडन किया है। उन्होंने रनिया में हथियार लगाने की फैक्ट्री की बाबत कहा कि हम फैक्ट्री क्यों लगाएंगे, हमारे पास हथियारों की कोई कमी नहीं है। दरअसल किसी ने यह भ्रम फैलाया है। उन्होंने कहा कि अगर रनिया में हथियार की फैक्ट्री होती तो अबतक पुलिस को सूचना मिल चुकी होती। रनिया के लोग जरूर अबतक पुलिस को इसकी जानकारी दे चुके होते। रनिया के जंगल में हथियार की फैक्ट्री लगाने की खबर का खंडन किया है। उन्होंने पीएलएफआई के पैड पर लिखकर खुद इसकी जानकारी दी।
गिरफ्तार उग्रवादियों ने फैक्ट्री का खुलासा किया था
बता दें कि पिछले दिनों रांची में गिरफ्तार उग्रवादियों ने रनिया में हथियार फैक्ट्री होने का खुलासा किया था। कहा गया था कि इसके लिए वह शहर से लोहा मंगवाता है। उसे कई व्यवसायी लोहे की सप्लाई करता है। दिनेश गोप के इस खंडन के बाद पुलिस-प्रशासन को रनिया में जाकर वास्तविक स्थिति का पता करना चाहिए। वहीं उसकी सफाई के बाद आईएमए के सचिव डॉ शंभू प्रसाद सिंह ने भी राहत की सांस ली होगी।