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अपनों पे सितम, गैरों पे करम.. ये ठीक नहीं..!!

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"पार्टी विथ डिफ़रेंस में कई डिफरेंसेस देखने को मिल रही है। आलाकमान का डर कहें या अनुशासन का पाठ, कोई खुलकर विरोध करने की स्थिति में नहीं है।  पार्टी सूत्रों की मानें तो अब मंच-मोर्चा में उनको जगह देकर डैमेज कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इस बीच चर्चा ये भी तेज है कि बाबूलाल अपने चहेते कार्यकर्ताओं के सवाल के जवाब देने से बचने के लिए खुद अपने गांव का रुख कर लिए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।" 

द फॉलोअप टीम 
बीजेपी की नयी कमिटी की घोषणा होने के बाद से ही पार्टी विथ डिफ़रेंस में कई डिफरेंसेस देखने को मिल रही है। आलाकमान का डर कहें या अनुशासन का पाठ, कोई खुलकर विरोध करने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा विरोध के स्वर दबी जुबान से ही सुनने को मिल रहा है। पार्टी कार्यालय से लेकर चौक-चौराहों तक चर्चा इसी बात की हो रही है कि कमिटी बनाने में किस बड़े नेता की सबसे ज्यादा चली। कोई अर्जुन मुंडा का नाम ले रहा है तो कोई रघुवर दास का तो कोई खुद दीपक प्रकाश और बाबूलाल का।  

किसी बड़े नेता का आदमी कहलाने से बच रहे हैं कार्यकर्त्ता   
उदाहरण दे - देकर कई कार्यकर्त्ता इस बात को प्रमाणित करने में लगे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की ही तूती बोली। कई नेता और कार्यकर्त्ता अब किसी बड़े नेता का आदमी कहलाने से बच रहे हैं। चौदह साल का वनवास ख़त्म कर बाबूलाल शायद इसी उम्मीद के साथ आये थे कि भगवान राम की तरह उनको राजगद्दी मिल जाएगी। स्वागत भी कुछ उसी अंदाज में हुआ। कार्यकर्ताओं ने प्रभु श्रीराम की ही तरह घर वापसी पर जोरदार स्वागत किया। प्रभात तारा मैदान में खचाखच भीड़ के बीच खुद अमित शाह ने गले लगाकर इनका इस्तकबाल किया। ये क्षण काफी सुखद और झाविमो से बीजेपी में आये कार्यकर्ताओं के लिए काफी उत्साहवर्धक भी रहा। लेकिन बीते समय के साथ बाबूलाल के चहेतों को प्रदेश कमिटी में जगह न मिलने से पसोपेश में पड़ गए। 

बाबूलाल के समर्थकों में तरजीह नहीं मिलने की नाराजगी   
खुद कभी झाविमो का हिस्सा रहे दीपक प्रकाश ने बिनोद शर्मा को उपाध्यक्ष बनाया, सरोज सिंह को पार्टी का प्रवक्ता बनाया तो रघुवर दास की मुखालफत कर राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले अभय सिंह को धनबाद का जिम्मा दे दिया। झाविमो से बीजेपी में आये सैकड़ों समर्थक ये पचा नहीं पा रहे कि बाबूलाल के लोगों को इतनी कम तरजीह क्यों दी गई। पार्टी सूत्रों की मानें तो अब मंच-मोर्चा में उनको जगह देकर डैमेज कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इस बीच चर्चा ये भी तेज है कि बाबूलाल अपने चहेते कार्यकर्ताओं के सवाल के जवाब देने से बचने के लिए खुद अपने गांव का रुख कर लिए। हालाँकि बाबूलाल के करीबियों का दावा है कि ये दौरा पूर्व से ही प्रस्तावित था। 

समर्थकों ने बाबूलाल से मिलकर अपनी आपत्ति भी जाहिर   
कमिटी में किसे रखना है और किसे नहीं रखना है ये पूरी जिम्मेदारी से प्रदेश अध्यक्ष की होती है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश की मानें तो इस बार की कमिटी संतुलित अनुभव के साथ - साथ नयी ऊर्जा को भी जगह दी गई है। झाविमो में पार्टी के महासचिव रहे अभय सिंह के समर्थकों ने बाबूलाल से मिलकर अपनी आपत्ति भी जाहिर कर दी है। वहीँ हटिया से झाविमो की उम्मीदवार रही शोभा यादव के समर्थकों ने भी सोमवार को प्रदेश कार्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज करा दी। वक्त रहते इन स्वरों को अगर शांत किया जा सका तो पार्टी में सबकुछ ठीक रहेगा। वरना कई नेता दलबदल भी करते आपको दिख जायेंगे। 

"बाबूलाल का दौरा पूर्व से ही निर्धारित था नाराजगी को लेकर कोई सवाल नहीं है"
सरोज सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा  

"कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि प्रदेश कमिटी में जगह मिलेगी लेकिन उसमें जगह नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. फिर भी पार्टी के फैसलों के साथ खड़ी हूँ."
शोभा यादव, भाजपा नेत्री  

"पार्टी ने योग्यता के अनुसार जो जिम्मेदारी दी है उसे पुरे मन से निभाउंगा. समर्थकों को लगता है कि और बड़ा भी पद मिलना चाहिए लेकिन जो जिम्मेदारी मुझे मिली है वह भी मेरे अनुसार छोटी नहीं है."
अभय सिंह, संगठन प्रभारी, धनबाद जिला