पाकुड़:
झारखंड के पाकुड़ जिला अंतर्गत काबिलपुर गांव में बांस से बनी पतली सी पुलिया के सहारे आवागमन करना पिछले 3 दशक से गांव वालों की नियति बन गई है। पश्चिम बंगाल से सटे पाकुड़ सदर प्रखंड अंतर्गत काबिलपुर गांव में ग्रामीण पिछले 30 साल से रोजाना बांस से बनी इसी अस्थायी पुलिया के सहारे आवागमन करते हैं। इस दौरान साइकिल हो या झोला, उन्हें कंधे पर टांगना पड़ता है। तस्वीरों से जाहिर है कि नदी पर बनी बांस की पुलिया के सहारे चलना, काफी जोखिम भरा काम है। यह जानलेवा साबित हो सकता है।

मानसून में उफान पर होती है बरसाती नदी
काबिलपुर गांव के पास बहने वाली ये नदी आगे जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। मानसून की बारिश में अभी नदी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है। कल्पना करना भी मुश्किल है कि यदि बांस की पुलिया को पार करते हुए कोई फिसलकर नीचे जा गिरा या दबाव से पुलिया ही टूट गई तो कितना बड़ा हादसा हो सकता है। चौंकाने वाली बात है कि स्कूली बच्चे भी रोजाना स्कूल जाने के लिए इसी पुलिया से होकर गुजरते हैं। कई बार उनके माता-पिता साथ होते हैं और कई बार बच्चों को अकेले ये बांस की पुलिया पार करनी पड़ती है। पिछले कई दिनो से हो रही बारिश से बांस की इस पुलिया में काफी फिसलन है और यह खतरनाक साबित हो सकती है।
पुलिया से गिरकर जान गंवा चुके हैं ग्रामीण
लोगों का दावा है कि अतीत में इस पुलिया से गिरकर लोगों की जान भी गई है। बारिश के मौसम में नदी उफान पर होती है। कभी भी जलस्तर इतना बढ़ सकता है कि पुलिया को बहा ले जाए। ऐसी स्थिति में काबिलपुर गांव का संपर्क जिला औऱ प्रखंड मुख्यालय से कट जायेगा। गांव टापू में तब्दील हो जायेगा। लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि नदी में अविलंब पक्की पुलिया का निर्माण कराया जाये, ताकि उनकी समस्या का स्थायी समाधान हो सके।