द फॉलोअप टीम
रांची - पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की मुश्किलें कम होती हुई नजर नहीं आ रही है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कंबल घोटाले मामले में जाँच के आदेश दे दिए हैं. सीएम ने झारक्राफ्ट के द्वारा हरियाणा के पानीपत से कंबल खरीदने में हुई अनियमितता के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को प्रारंभिक जांच (पी ई ) दर्ज कर जांच करने के प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति दे दी है. कंबल खरीदने में हुई अनियमितता के मामले में झारक्राफ्ट के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी रेणु गोपीनाथ पणिकर, उप महाप्रबंधक मोहम्मद नीसम अख्तर और मुख्य वित्त पदाधिकारी अशोक ठाकुर को आरोपी बनाया गया है. बीते सोमवार को सरयू राय ने भी रघुवर दास के ऊपर गंभीर आरोप लगाए थे.
क्या है मामला ?
दरअसल उद्योग विभाग के झारक्राफ्ट द्वारा कंबल खरीद में हुई अनियमितता की विस्तृत जांच और आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने बाद ही मुख्यमंत्री ने यह निर्देश दिया है l इसके तहत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को प्रारंभिक जांच के लिए ऐसे मामले सौपे जाएंगे, जिनमें लोक सेवकों के विरुद्ध पद के आपराधिक दुरुपयोग और भ्रटाचार के आरोप समाहित होंगे l
रघुवर सरकार के कार्यकाल में लगा था घोटाला का आरोप
झारखंड सरकार ने साल 2017-18 के दौरान गरीबों के बीच बांटने के लिए करीब 10 लाख कंबल बनाने का जिम्मा झारक्राफ्ट को सौंपा था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था कि “हर साल यह काम टेंडर कर निजी कंपनियों को दिया जाता था, लेकिन इस बार हम लोग कंबल बुनाई का काम राज्य की सखि मंडलों और बुनकर समितियों को देंगे ताकि वे आर्थिक तौर पर मजबूत हो सकें। यह काम झारक्राफ्ट के जरिये होगा। सरकार इन कंबलों को खरीदेगी और इन्हें गरीबों में बांटा जाएगा। लिहाजा, इसके लिए टेंडर की जरूरत नहीं। इसके बाद झारक्राफ्ट ने कंबल बुनाई के लिए पानीपत से 18.81 लाख किलो ऊनी धागा ट्रकों से मंगाने और उसकी बुनाई के बाद फिनिशिंग टच के लिए कंबलों को पानीपत भेजने के लिए कुछ कंपनियों से करार किया। एजी के रिपोर्ट ने बताया था कि झारक्राफ्ट ने जिन ट्रकों से धागा मंगवाने और फिर उन्हें फिनिशिंग के लिए पानीपत भेजने का दावा किया है, वे जांच में फर्जी पाए गए हैं। एजी ने इन ट्रकों के पानीपत से झारखंड आने के दौरान विभिन्न टोल प्लाजा से उनके गुजरने के दावे का जब एनएचएआई (नेशनल हाईवे आथरिटी आफ इंडिया) के दस्तावेजों से मिलान किया था, तो वे दावे फर्जी पाए गए थे। दरअसल, उन तारीखों पर वे ट्रक इन टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं थे। झारक्राफ्ट ने 144 ट्रकों के 320 फेरे लगाने का तारीखवार दस्तावेज सौंपा था। इनमें से 318 ट्रिप फर्जी पाए गए थे। पानीपत से 19.93 लाख किलो ऊनी धागा मंगवाने के दावे की जांच के क्रम में एजी ने पाया कि इनमें से 18.81 लाख किलो धागा मंगाया ही नहीं गया था और इसके एवज में करीब 14 करोड़ का भुगतान कर दिया गया था। ऐसे कुछ और भुगतान भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर किए गए थे। एक-एक सखि मंडल से एक दिन में तीन-तीन लाख पीस कंबलों की बुनाई के दावे किए गए थे, जो संभव ही नहीं थे.