logo

झारखण्ड में शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत

2523news.jpg
डॉ. लंबोदर महतो, आजसू विधायक, गोमिया
झारखंड गठन के 20 साल पूरे हो गए हैं। इस अवधि में झारखंड ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे। इस दौरान राज्य में  विकास के कई काम हुए। इसके बावजूद कई काम अभी भी होने बाकी हैं। खासकर शिक्षा और स्वास्थ्य में काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। राज्य के समक्ष विकास की दौड़ में आगे बढ़ने और विकसित प्रदेशों के समकक्ष खड़े होने की चुनौती भी है। खनिज और प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण झारखंड में विकसित राज्यों के समानांतर खड़ा होने की संभावना है। जरूरत है इस संभावना को धरातल पर उतारने की। इसके लिए सही विजन और राजनीतिक सोच की जरूरत है।

बात करते हैं स्वास्थ्य की। 
राज्य में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है। यहां मातृत्व मृत्यु अनुपात अर्थात एमएमआर में लगातार कमी आई है। यह अनुपात राज्य में वर्ष 2004-06 में 312 थी जो घटकर 71 हो गई। इसी साल जुलाई में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में प्रसव के दौरान मातृत्व मृत्यु अनुपात 71 दर्ज किया गया है, जो पिछली बार (2015-2017 में) जारी सर्वे के आंकड़ों की तुलना में पांच कम है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह राष्ट्रीय अनुपात 113 से से काफी कम है। राज्य गठन से पहले यहां महज तीन मेडिकल कॉलेज थे। देर से ही सही पहली बार पलामू, हजारीबाग तथा दुमका में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हुई। इससे एक साथ राज्य में एमबीबीएस की 300 सीटें बढ़ गईं। वहीं, देवघर में एम्स की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। इन सबके बीच कुपोषण और एनीमिया राज्य के लिए बड़ी समस्या है। यहां लगभग आधे बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं। लगभग 70 फीसद महिलाएं खून की कमी से जूझती हैं। इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

राज्य में कई उच्च शिक्षण संस्थान भी खुले। राज्य गठन के बाद राज्य में जहां आइआइएम, सेंट्रल यूनिवर्सिटी जैसे केंद्रीय संस्थान खुले, वहीं राज्य स्तर पर रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, होटल प्रबंधन संस्थान जैसे संस्थान खुले। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि झारखंड अभी भी 18 से 23 आयुवर्ग के एक लाख आबादी पर महज आठ कॉलेज उपलब्ध हैं। इस मामले में झारखंड अंतिम पायदान पर है। देश की बात करें तो एक लाख की आबाद पर 28 कॉलेज उपलब्ध है। राज्य में वर्ष 2011-12 में एक लाख की आबादी पर सात कॉलेज उपलब्ध थे। इस तरह, नौ वर्ष में राज्य में एक लाख की आबादी पर महज एक कॉलेज बढ़ा। झारखंड में उच्च शिक्षा में ग्रास इनरालमेंट रेशियो 19.5 फीसद है, जबकि देश में यह अनुपात 26.3 है।

अच्छी बात यह है कि झारखंड श्रम सुधार के क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से लगातार देश में पहले स्थान पर रहा। झारखंड उन राज्‍यों में शामिल हो गया है, जो शत-प्रति‍शत खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित है। झारखंड के 46,889 गांव ओडीएफ हो चुके हैं।

झारखंड ने खेल के क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन किया है। झारखंड ने हॉकी, फुटबाल,क्रिकेट, कबड्डी, तीरंदाजी, मुक्केबाज़ी और पर्वतारोहण आदि खेलों में बहुत से प्रतिभाशाली खिलाड़ी देश को दिए। क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी जैसा सफल कप्तान और खिलाड़ी देश को मिला। तीरंदाजी में विश्व में नंबर एक स्थान पर रह चुकी, कॉमनवेल्थ खेलों की स्वर्ण पदक विजेता दीपिका कुमारी ने राज्य का और पूरे देश का सम्मान बढ़ाया। 
नोट - यह आलेख लेखक निजी विचार हैं। लेखक डिप्टी कलेक्टर रह चुके हैं।