द फॉलोअप टीम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात की। इसमें उन्होंने झारखंड के गुमला जिला के बिशुनपुर का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे बिशुनपुर के लोग लेमन ग्रास की खेती कर आत्मिनिर्भर बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि बिशुनपुर इलाके में 30 से अधिक समूह लेमन ग्रास की खेती से जुड़ हुए हैं और अपना जीवन स्तर सुधार रहे हैं। पीएम मोदी के मन की बात में गुमला के बिशुनपुर का जिक्र करने और लेमन ग्रास की खेती का जिक्र करने से गांव के लोग काफी खुश हैं। पीएम मोदी ने बताया कि यह लेमन ग्रास चार महीनों में तैयार हो जाता है। इस लेमन ग्रास से तेल बनाया जाता है और यह बाजार में ऊंची कीमत पर बिकता है। उन्होंने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि लोग आत्म निर्भर बनें।
हर साल 7 लाख का मुनाफा
आइये आपको गुमला के बिशुनपुर में तैयार किये जा रहे लेमन ग्रास की पूरी स्टोरी बताते हैं। गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड के बेती गांव की महिलाएं समूह बनाकर बंजर भूमि में लेमन ग्रास की खेती कर प्रत्येक साल लाखों रुपए का मुनाफा कमा रही हैं। इस गांव की महिलाओं को देखकर बिशुनपुर प्रखंड के अन्य गांव की महिलाएं भी लेमन ग्रास की खेती में लग गई है। उन्होंने इसके लिए गांव के ही लोगों से दस एकड़ जमीन लीज पर लेकर काम शुरू किया। गांव के लोग उस भूमि पर कोई खेती नहीं करते थे, लेकिन विमला बताती हैं कि वह चमेली आजीविका सखी मंडल ग्रुप की महिलाओं के साथ लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। उन्होंने बताया कि समूह में यह फैसला लिया गया कि चूंकि लेमन ग्रास को कोई मवेशी नहीं खाता है ऐसे में इसकी खेती करना और भी आसान हो जाता है।
..और इस तरह बनता गया कारवां
जब चमेली आजीविका सखी मंडल समूह की ओर से लाखों रुपए की कमाई की गई तो इसे देखते हुए दूसरे महिला समूह भी लेमन ग्रास की खेती में जुड़ गए। विमला देवी ने बताया कि एक बार लगाने के बाद दूसरी बार लेमन ग्रास को नहीं लगाना पड़ता है। यह चार माह में खुद-ब-खुद थोड़ी मेहनत के साथ तैयार हो जाता है। ये महिलाएं खेती के लिए तैयार होने के बाद उसे काटकर उसका तेल निकालकर बाजार में बेचती हैं। इस तेल की कीमत प्रति लीटर दो हजार रुपये हैं। हालांकि इस इलाके में लेमन ग्रास का तेल के लिए बाजार नहीं है। इसलिए तेल को बाहर भेजना पड़ता है। महिलाओं का कहना है कि अगर यहां बाजार होता तो ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता था। वहीं, बिशुनपुरप्रखंड क्षेत्र के सेरका गांव की महिलाएं भी समूह बनाकर लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। यहां की महिलाओं ने बताया कि लेमन ग्रास को एक बार लगाने के बाद यह 5 सालों तक रहता है। उन्होंने बताया कि साल में 4 बार इस फसल को काटा जाता है, जिसके बाद उससे तेल निकाला जाता है। इसके साथ ही लेमन ग्रास को चाय पत्ती के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
लेमन ग्रास की चाय से बीमारियों से मिलता है छुटकारा
महिलाओं ने बताया कि लेमन ग्रास की चाय पीने से कई तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है। महिलाओं के मुताबिक सबसे पहले लखनऊ से लेमन ग्रास का बिछड़ा मंगा कर एक जगह लगाया गया। बाद में इसे पूरे बिशुनपुर प्रखंड में फैलाया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के सदस्य मनोरंजन कुमार ने पूरे बिशनपुर प्रखंड में महिला समूह को जानकारी दी कि लेमन ग्रास की खेती से लाखों की कमाई कर सकते हैं और कृषि विज्ञान केन्द्र में महिला समूह को प्रशिक्षण देकर खेती करने के लिए प्रेरित भी किया जा सकता है।