द फॉलोअप टीम, डेस्क:
कोरोना के चलते टोक्यो ओलिंपिक 2020 की शुरुआत एक साल देरी के साथ 2021 में आज से होने को है। दुनिया भर के एथलीट्स जिंदगी के कई साल सिर्फ इसी एक लक्ष्य पर लगा देते हैं कि वो कैसे ओलंपिक के पोडियम तक पहुंचें। मेडल खिलाड़ी की सालों की मेहनत, त्याग और समर्पण का प्रतीक होता है। इस बार 206 देशों के लगभग 11 हजार खिलाडी हिस्सा ले रहे हैं। ओलिंपिक में सभी खिलाडी 33 खेलों के साथ 339 मेडल के लिए आपस में भिड़ेंगे। खेलों के महाकुंभ में हिस्सा लेने वाले हर खिलाड़ी का सपना गोल्ड जीतने का ही होता है। लेकिन आपको बता दे कि ओलंपिक के पोडियम तक पहुंचना और अपने आप को वहां प्रस्तुत करना बहुत बड़ी बात होती है। इस बार के ओलंपिक इसलिए भी खास हैं, क्योंकि ओलिंपिक मेडल तैयार करने में जापान जनता का सहयोग लिया गया है।
ओलंपिक पदकों को तैयार करने में टोक्यो 2020 की आयोजन समिति (Tokyo 2020) ने पूरे जापान में इस्तेमाल किए गए पुराने मोबाइल फोन जैसे छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इकठ्ठा किया। इसे इकठ्ठा करने के लिए 'टोक्यो 2020 मेडल प्रोजेक्ट' की शुरुवात 2017 में ही किया गया था। जापान के नागरिकों से अप्रैल 2017 से मार्च 2019 के बीच अलग-अलग राज्यों की म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन ने करीब 78,985 टन इस्तेमाल किए गए मोबाइल फ़ोन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम इकठ्ठा किए।

जापान के जनता से इकठ्ठा किये गए 32 किलो सोना
आपको जानकर ताजुज्ब होगा कि मेडल तैयार करने में आयोजन समिति ने नागरिकों से करीब 78,985 टन इलेक्ट्रॉनिक आइटम जमा किया गया था। जिसमे 62 लाख पुराने मोबाइल शामिल है। इन सारे आइटम को रिसाइकल करके कुल 32 किलो सोना, करीब 3500 किलो चांदी और 2200 किलो पीतल इकठ्ठा किया गया। इकठ्ठा किए गए इन धातुओं से कुल 5 हजार मेडल तैयार किए गए हैं।

गोल्ड मेडल में कितना गोल्ड ?
टोक्यो 2020 की आयोजन समिति को लोगों से भले ही 32 किलो सोना मिला हो। लेकिन आपको बता दें कि मेडल पूरी तरह सोने के नहीं बने हैं। इसमें नाममात्र का गोल्ड इस्तेमाल हुआ है। इस पर सोने का पानी चढ़ाया गया है। टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों को जो गोल्ड मेडल दिया जाएगा। वो असल में चांदी से बना होगा। 556 ग्राम के गोल्ड मेडल को तैयार करने में सिर्फ 6 ग्राम सोने का इस्तेमाल हुआ है। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ की मौजूदा गाइडलाइन के मुताबिक, गोल्ड मेडल में कम से कम 6 ग्राम सोना होना चाहिए। यानी मेडल में ज्यादा हिस्सा चांदी का ही होता है। इसी प्रोटोकाल को देखते हुए टोक्यो ओलिंपिक ने एसा किया है। इसके अलावा पदक कम से कम 60 मिमी व्यास और 3 मिमी मोटे होने चाहिए।
आपके जानकारी के लिए बता दे कि आखिरी बार 1912 के स्टॉकहोम ओलंपिक में खिलाड़ियों को असली गोल्ड मेडल दिए गए थे।