द फॉलोअप टीम, रांची :
दल-बदल मामले में अब एक नया मोड़ आ गया है। इसके खिलाफ विधानसभा सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने सुप्रीम कोर्ट में एस एल पी दायर कर हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। पहले विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नोटिस जारी करने के बाद हाइकोर्ट ने उसपर रोक लगा दी थी। झारखंड हाइकोर्ट ने पिछले दिनों बाबूलाल मरांडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पीकर के ट्रिब्यूनल में चल रहे दल-बदल मामले की सुनवाई पर 13 जनवरी तक रोक लगा दी थी। दल-बदल मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा।
स्पीकर के पास नोटिस जारी करने का नहीं है अधिकार
उच्च न्यायालय ने बीते 17 दिसंबर को यह टिप्पणी करते हुए विधानसभा अध्यक्ष की नोटिस पर रोक लगा दी थी कि 10वीं अनुसूची में अध्यक्ष को स्वतः संज्ञान लेकर नोटिस जारी करने का अधिकार नहीं है। विधानसभा की तरफ से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अपनी पक्ष रखते हुए कहा था कि दल-बदल के इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा लिया गया संज्ञान संवैधानिक है। उन्होंने इस दौरान यह भी कहा था कि आर्टिकल 226 के तहत जब तक विधानसभा के न्यायाधिकरण में यह मामला लंबित है, अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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विधायक भूषण तिर्की के आवेदन पर 17 दिसंबर को जारी किया था नोटिस
विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो ने विधायक भूषण तिर्की के आवेदन पर 10वीं अनुसूची के तहत बाबूलाल मरांडी को एक बार फिर बीते 17 दिसंबर को नोटिस जारी किया था। नोटिस में बाबूलाल मरांडी से दोबारा यह पूछा गया है कि क्यों न आपके खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की जाए। इसके पहले स्पीकर की ओर से स्वतः संज्ञान लेते हुए बाबूलाल को नोटिस जारी किया गया था।
पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुके हैं
बाबूलाल दल-बदल मामले में बाबूलाल मरांडी पहले ही सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं। मरांडी ने सर्वोच्च न्यायालय में कैविएट दाखिल की है। उनके अधिवक्ता आरएन सहाय के अनुसार उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि सुनवाई के दौरान उनका भी पक्ष अदालत में सुना जाये।