logo

फ्रेंडशिप डे स्पेशल: यारों के यार हैं सीएम हेमंत सोरेन, एक ही गाड़ी से 3 दोस्तों की गई थी बारात

599news.jpg
सन्नी शारद, रांची 
आज फ्रेंडशिप डे है। यानी दोस्तों का दिन। उन दोस्तों का दिन, जिनके साथ जी भरकर आपने जिंदगी जी हो।  वो दोस्त, जिनके सामने आप हमेशा दिल खोलकर बातें करते हो। वो दोस्त, जो हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ा रहता हो। आज के दिन हर कोई अपने हर दिल अजीज दोस्तों को याद करता है। इसीलिए आज हम आपको मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की यारी के बारे बताएँगे। बताएँगे कि कैसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके दो दोस्तों की शादी न सिर्फ एक ही साल हुई, बल्कि एक ही गाड़ी में तीनों दोस्तों की बारात भी घूमी।     

 

हेमंत सोरेन हैं यारों के यार
वैसे तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जो एक बार मिलता है, वह उनका मुरीद हो जाता है। शर्मिला अंदाज और बात करने की व्यवहारिक शैली से हेमंत हर किसी का दिल जीत जाते हैं। पहली मुलाकात में हेमंत किसी के यार हो जाते हैं, तो किसी के बड़े भैया। हेमंत सोरेन बीआईटी मेसरा के स्टूडेंट रहे हैं। बीआईटी में हेमंत 1994 बैच के छात्र थे। बीआईटी में जूनियर होने के वावजूद रांची के रहने वाले इंद्र शेखर झा हेमंत के बेहद करीब थे। इंद्र 1995 बैच के थे। हेमंत और इंद्र की नजदीकी कॉलेज में रैगिंग के दौरान हुई थी। उस वक्त हेमंत ने इंद्र को न सिर्फ रैगिंग से बचाया था, बल्कि बाद में अकेले में आकर उनके कमरे में भी मिलकर कहा था कि उन्हें कुछ नहीं होगा। बाद में इंद्र और हेमंत की बॉन्डिंग इतनी जबरदस्त हो गयी कि दोनों एक दूसरे पर जान लुटाने लगे। दोनों एक साथ घूमते थे। खूब गप्पे मारते थे। यही नहीं जब कभी भी हेमंत अपने घर जाते, इंद्र को भी साथ लेकर जाते थे। इंद्र पुराने दिनों की बात बताते हैं कि कैसे ठण्ड के मौसम में एक बार हम दोनों मोरहाबादी आवास में सोये थे। एक ही कम्बल थी। तब हेमंत ने कम्बल डबल कर उन्हें ओढ़ा दिया था और  खुद बेडशीट ओढ़कर ही सो गए। इंद्र एक वाक्ये का जिक्र करते हुए बताते हैं कि 21 जनवरी 2016 को मेरे बड़े भाई डॉ आनंद शेखर झा को हार्ट अटैक आ गया। इसकी जानकारी भरत भूषण जी ने हेमंत सोरेन को दी, तब हेमंत 10 मिनट के अंदर रिम्स पहुँच चुके थे। रिम्स पहुँचने के बाद हेमंत ने डॉक्टरों से कहा था कि चाहे जो जरुरत हो लगा दो लेकिन मेरे दोस्त के भैया को कुछ नहीं होना चाहिए। इंद्र एक और वाक्या का जिक्र करते हुए थोड़े भावुक होकर बताते हैं कि हमलोगों का एक जूनियर था पंकज कुमार लाल। मेकॉन में कार्यरत था। उसे कैंसर हो गया था। बैंगलोर इलाज के लिए उसे ले जाया गया। हेमंत और मैं यानी इंद्र दोनों बैंगलोर तक उनसे मिलने गए थे। जब पंकज थोड़ा ठीक हो गए तो रांची आ गए लेकिन फिर उनकी तबीयत बिगड़ गई। उस वक्त हेमंत सोरेन अपने स्तर से एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था कर पंकज को इलाज के लिए दिल्ली भिजवाया था। हालांकि हमलोग उन्हें बचा नहीं पाए। इंद्र बताते हैं कि पंकज भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन हेमंत ने उन्हें मेन्टल सपोर्ट बहुत किया। 



कॉलेज के दोस्तों के ज्यादा करीब हैं हेमंत  
हेमंत सोरेन बीआईटी मेसरा के दोस्तों के बेहद करीब हैं। बीआईटी मेसरा में उनके बैचमेट में शैलेश सिंह, अरुण चंद्रा, बिनोद कुमार, राजेश श्रीवास्तव, रोहित उरांव और नीरज झा से उनकी अच्छी दोस्ती थी। ये आज भी कायम है। राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें याद नहीं था कि आज फ्रेंडशिप डे है। खुद हेमंत सोरेन ने ही फोनकर उन्हें कहा कि "अबे आज फ्रेंडशिप डे है" राजेश बताते हैं कि हेमंत भले ही मुख्यमंत्री बन गए हैं, लेकिन आज भी बदले नहीं। दोस्तों के लिए वे हमेशा समय निकाल ही लेते हैं। राजेश बताते हैं कि कॉलेज के दिनों से ही हेमंत सुलझे हुए थे। 4 आदमी का कहीं भी झगड़ा होता था तो, वह बीच में आकर अक्सर झगड़ा सुलझा देते थे। राजेश के अनुसार हेमंत बाइक प्रेमी हैं। कॉलेज के दिनों में उनके पास पल्सर और बुलेट बाइक थी।




एक ही गाड़ी पर तीन दोस्तों की बारात घूमी थी
हेमंत के याराना का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि हेमंत जिसे अपना दोस्त मान लेते हैं, उसके लिए सबकुछ कुर्बान कर देते हैं। एक समय हेमंत सोरेन की तिकड़ी काफी मशहूर थी। हेमंत, पवन और रंजीत ये तीनों बचपन के दोस्त हैं। रंजीत बोकारो के रहने वाले हैं तो पवन जमशेदपुर के। रंजीत सिंह बताते हैं कि बचपन से जब हमलोग जवानी तक पहुंचे तो शादी को लेकर अक्सर बातें होती थी। तीनों कहते थे कि पहले मैं शादी नहीं करूँगा। सभी पहले हेमंत पर शादी करने के लिए दबाव डालते थे। फरवरी 2006 में हेमंत सोरेन ने शादी कर ली, उसके बाद दोस्तों पर भी दबाव बना। फिर अप्रैल 2006 में रंजीत की शादी हुई और जून 2006 में पवन की शादी हो गई। तीनों दोस्तों के एक ही वर्ष में शादी की। लिहाजा कुछ न कुछ तो खास है इनमें। लेकिन उससे खास बात यह थी कि एक ही गाड़ी में तीनों दोस्तों की बारात घूमी। एक ही गाड़ी पर दूल्हा सवार होकर बारात लेकर निकले। रंजीत बताते हैं कि फिएस्टा गाड़ी पर सवार होकर पहले हेमंत सोरेन बारात लेकर गए थे, उसके बाद हम दोनों यानी पवन और मैं भी उसी गाड़ी से शादी के लिए गए। 




बचपन के दोस्तों के लिए जान छिड़कते हैं
हेमंत के बचपन के दोस्तों की लिस्ट भी काफी लम्बी है। इनमें पवन कुमार और रंजीत सिंह का नाम भी शामिल है। रंजीत, हेमंत के बोकारो सेक्टर-6 आवास के पास रहते हैं। हेमंत की माँ रूपी सोरेन रंजीत के पिता को राखी भी बांधती थी। दोनों बचपन में साथ में भले ही नहीं पढ़े लेकिन दोनों साथ खेलकर ही बड़े हुए हैं। हेमंत केंद्रीय विद्यालय में पढ़ते थे तो रंजीत सेल के स्कूल में। रंजीत बताते हैं कि हेमंत अभी भी बचपन की दोस्ती को भूले नहीं। रंजीत ने बताया कि 2018 में वे अपने 5 साल के बेटा का इलाज कराने रांची गए थे। उस वक्त वह हेमंत के आवास में ही रुके थे। बच्चे की बीमारी की पूरी जानकारी हेमंत को नहीं थी। वे सिर्फ बच्चे को देखकर बोले कि इसका इलाज सीएमसी वेल्लोर में करवाओ और दूसरे दिन ही पूरे परिवार का टिकट वेल्लोर जाने का कटवा दिया। रंजीत आगे बताते हैं कि इसी वर्ष 20 मई 2020 को मेरा स्टोन का ऑपरेशन होना था। मैं ऑपरेशन थियटर में जा रहा था। उसी वक्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का फोन आया और वे इस बात पर गुस्सा भी हुए कि उन्हें सूचना क्यों नहीं दी।