द फॉलोअप टीम, रांची :
झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच आनेवाले समय में टकराव बढ़ना तय लग रहा है। पिछले दिन डीवीसी के बकाया मद की राशि के प्रथम किश्त के रूप में राज्य सरकार के खाते से की गई 1418 करोड़ की सीधी कटौती पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही अपनी नाराजगी जता चुके हैं। अब वह इस मामले में जल्द ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखेंगे। इस कड़े पत्र में राज्य सरकार की विभिन्न कोल कंपनियों पर बकाये की राशि के अलावा जीएसटी कंपनसेशन का भी जिक्र होगा।
तथ्यात्मक आंकड़ा उपलब्ध कराने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने अनौपचारिक रूप से सरकार के शीर्ष अधिकारियों को इस मामले में तथ्यात्मक आंकड़ा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जिसमें कोल कंपनियों के यहां जमीन के मुआवजा मद में कितना बकाया है, कुल राशि का विस्तार से जिक्र होगा। इसके अलावा रेलवे के माध्यम से राज्य से बाहर जा रहे कोयले की मात्रा की गणना नहीं होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री इसे पूर्व में ही स्पष्ट कर चुके हैं कि रेलवे से होनेवाली ढुलाई का आंकड़ा नहीं होने के कारण राज्य सरकार को रॉयल्टी के मद में एक बड़ी राशि का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सीधी कटौती भी मुद्दा बनेगा
सूत्रों का कहना है कि पीएम के अलावा केंद्रीय वित्त व कोयला मंत्री को भी पत्र की प्रति दी जाएगी। उसमें डीवीसी की झारखंड के प्रति जिम्मेदारियों का भी जिक्र होगा, जिसका वह पालन नहीं कर रहा है। इसके अलावा अन्य राज्यों के यहां बकाये की राशि की कटौती नहीं कर, केवल झारखंड सरकार के खाते से सीधी कटौती को भी मुद्दा बनाया जाएगा।
टेंडर भरने की पुरानी व्यवस्था फिर लौटेगी
इधर, झामुमो ने हेमंत सोरेन से पूर्व में लिए गए दो फैसलों पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। पार्टी प्रवक्ता मनोज कुमार पांडेय ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसे सीएम ने मौके पर ही अग्रेतर कार्रवाई के लिए सचिव भवन निर्माण को निर्देशित कर दिया। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि पांच लाख से 50 लाख रुपए तक की निविदा को ऑनलाइन किये जाने से काफी परेशानी हो रही है। खास कर ग्रामीण इलाकों के संवेदक इससे परेशान हैं। यह पीडब्ल्यूडी कोड के अनुरूप भी नहीं है। इसी तरह 10 फीसदी से भी नीचे जाकर टेंडर भरने की दी गई छूट से भी गुणवत्ता पर असर पड़ने की संभावना है। इससे स्थानीय निवासियों को 25 करोड़ रुपए तक के कार्य देने का फैसला लागू नहीं हो पाएगा।