द फॉलोअप टीम
रांची : राम मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 4 अगस्त की सुबह 10 बजे रांची की मेयर आशा लकड़ा के आवास से 25 से अधिक पाहनों का जत्था अयोध्या रवाना होगा। पाहन पारंपरिक वेशभूषा में रहेंगे। विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी की उपस्थिति में पाहनों का जत्था सड़क मार्ग से रवाना होगा। अयोध्या में 5 अगस्त को भूमिपूजन होनेवाला है।
भूमिपूजन से आदिवासी समाज में हर्ष
राष्ट्रीय भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य अशोक बड़ाइक ने कहा कि अयोध्या में 500 साल बाद राम मंदिर का निर्माण होने से आदिवासियों में हर्ष है। आदिवासी समाज द्वारा सरना स्थल की मिट्टी अयोध्या भेजे जाने से झारखंड की आदिवासी परंपरा को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। पाहनों का मानना है कि राम आदिवासी समाज से अलग नहीं हो सकता।
आदिवासियों के दिल में बसते हैं राम
उन्होंने कहा कि 14 साल के राम वनवास में जंगलों में उनका अधिक समय आदिवासी समाज के साथ ही बीता है। उन्होंने कहा कि झारखंड में तो रामरेखा धाम है। आदिवासी समाज अपने नामों में राम और सीता का प्रयोग करते हैं। गोदना प्रथा के तहत, हे राम, राम, राम-सीता भी गोदवाते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों के दिल में राम बसते हैं। आदिवासी समाज राम से दूर हो ही नहीं सकते।
ईसाई मिशनरियों के इशारे पर फूट डालने की कोशिश
उन्होंने विरोध करनेवाले तथाकथित आदिवासी संगठनों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ विदेशी और ईसाई मिशनरी के इशारों पर काम करने के आदी हो गए हैं। वे नहीं चाहते कि आदिवासी फले-फूले। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व आदिवासियों के बीच आदिवासी सनातनी समाज के बीच में फूट डालकर अलगाव पैदा करना चाहते हैं। उनका आरोप है कि ऐसे तत्व सीधे-सादे आदिवासियों को बरगला कर मिट्टी उठाओ अभियान का विरोध करवाया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के अगुवा पाहन, पुजार, पइनभोरा, कोटवार जैसे धार्मिक अगुवा हैं, जो पूरे विधि-विधान से सरना स्थल की मिट्टी को पारंपरिक पूजा-पाठ करने के बाद मिट्टी उठायी गई है।
मिट्टी उठाने का विरोध
उल्लेखनीय है कि आदिवासी समुदाय के कई संगठनों ने मिट्टी उठाने का विरोध किया है। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष नारायण उरांव ने कहा है कि 25 प्रतिशत आदिवासी हिंदू धर्म को सम्मान देते हैं, लेकिन उसे अपना नहीं सकते। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा जैसे आदिवासी संगठन भी विरोध पर उतारू हैं। इधर, सरना स्थल से अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए मिट्टी उठाने का विरोध करते हुए झारखंड के 24 प्रमुख आदिवासी संगठनों ने ऐलान किया है कि मिट्टी उठाने में शामिल रांची की मेयर आशा लकड़ा, प्रदेश भाजपा की महिला अध्यक्ष आरती कुजूर समेत पूर्व विधायक रामकुमार पाहन और गंगोत्री कुजूर का सामाजिक बहिष्कार करने की बात कही है। इन जनप्रतिनिधियों के घर-परिवार में होनेवाले शादी-विवाह, जन्म-मरण समेत अन्य सामूहिक कार्यों में समाज का कोई भी व्यक्ति न जाएगा और उन्हें शिरकत करने देगा। समाज से इनका हुक्का-पानी बंद किया जाता है। अब देखना है कि मिट्टी उठाने का विरोध करने और समर्थन का विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। भूमिपूजन के बाद आदिवासी संगठनों की आगे की लड़ाई क्या मोड़ लेगी, या टांय-टांय फिस्स हो जाएगी, ये 5 अगस्त के बाद ही पता चलेगा।