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1 अगस्त से बेरोजगार हो जायेंगे पीआरडी के जनसंवाद केंद्र में काम करने वाले 140 कर्मचारी

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द फॉलोअप टीम 
रांची : झारखण्ड में जनसंवाद अब बंद हो जायेगा। एक फोन  कॉल पर वर्षों से लंबित समस्याओं का निपटारा अब झारखण्ड में संभव नहीं रह जायेगा। मतलब जिस 181 नंबर पर फोन करके आप अपनी समस्याएं दर्ज करवाते थे और उसका त्वरित निष्पादन होता था वो अब नहीं हो पायेगा। क्यूंकि झारखंड सरकार ने माइका का अनुबंध रद्द कर दिया है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने इस संबंध में आदेश निर्गत किया है। ये कंपनी सूचना भवन में जनसंवाद केन्द्र का संचालन करती थी। कोरोना के समय से जनसंवाद केन्द्र को कोविड कंट्रोल रूम में बदल दिया गया था। तब से ये कंपनी कोविड कंट्रोल रूम का संचालन कर रही थी। इस कंपनी में फिलहाल 140 लोग काम कर रहे हैं। सरकार बदलते हीं इन कर्मचारियों के वेतन भुगतान में भी दिक्कतें आ रही थी। 

एक दूसरे पर फेंकी जा रही जिम्मेदारी
द फॉलोअप से बात करते हुए पीआरडी के डायरेक्टर राजीव लोचन बख्शी ने कहा कि हमने ये काम माइका कंपनी को दिया था लिहाजा अब ये कंपनी की जिम्मेदारी बनती है कि उनके यहां काम कर रहे कर्मचारियों के साथ वे क्या करते हैं। वहीं, कंपनी के डायरेक्टर संजय जैन ने कहा कि कर्मचारियों के साथ हमारा जो करार हुआ है उसमें ये साफ तौर पर लिखा है कि पीआरडी के साथ कंपनी का करार टुटते हीं उन 140 कर्मचारियों के साथ करार खत्म हो जायेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ये अब मेरी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि मैं काम कर रहें 140 लोगों को  रोजगार से जोड़ पाऊं और मैं उस दिशा में सोच रहा हूं।

रघुवर सरकार की थी महत्वकांक्षी योजना
आपको बता दें कि मई, 2015 से जनसंवाद केंद्र की सेवा तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के समय में शुरू की गयी थी। खुद रघुवर दास ने 181 पर फ़ोन कर इसका औपचारिक उद्घाटन किया था। राज्यभर से कोई भी इस नंबर पर फ़ोन करके अपनी शिकायत दर्ज कराता था। महीने में एक बार सीएम खुद इसकी समीक्षा करते थे और आवश्यक कार्रवाई का निर्देश देते थे। लोग इसकी वेबसाइट के जरिये या सूचना भवन जनसंवाद केंद्र आकर शिकायत दर्ज कराते थे। यहां प्राप्त शिकायतों के आधार पर उसे संबंधित विभाग के पास भेजा जाता था।

1 करोड़ महीना होता था खर्च
जनसंवाद केंद्र के संचालन के लिए माइका को प्रतिमाह लगभग 1 करोड़ का भुगतान किया जाता था। यानी जनसंवाद केन्द्र के संचालन पर हर साल 12 करोड़ रुपये खर्च होता था। जनसंवाद केंद्र चलानेवाली एजेंसी माइका के अनुसार उसके पास अब तक 5 लाख के आसपास शिकायत आए थे। इनमें से साढ़े 3 लाख के आसपास शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है। अब करार रद्द हो जाने के बाद बड़ा सवाल ये है कि बाकी मामलों का क्या होगा ?