मुंबई
जब समाज में बच्चियों के जन्म पर सवाल उठते हैं, तब श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ने एक मिसाल कायम करने का फैसला किया है। ट्रस्ट ने एक नई और सराहनीय योजना — ‘श्री सिद्धिविनायक भाग्यलक्ष्मी योजना’ शुरू करने का ऐलान किया है, जो नवजात बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
इस योजना के तहत महाराष्ट्र के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाली हर बच्ची के नाम से उनकी मां के बैंक खाते में ₹10,000 की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की जाएगी। ट्रस्ट की प्रबंधन समिति इस योजना को पहले ही मंजूरी दे चुकी है और इसे सरकार की स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से होगी शुरुआत
इस प्रेरणादायी पहल की शुरुआत 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन से करने की योजना है। ट्रस्ट चाहता है कि इस खास दिन जन्म लेने वाली बेटियों को पहली बार इस योजना का लाभ मिले। 31 मार्च को ट्रस्ट अध्यक्ष सदानंद सरवणकर की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में इस योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही, ट्रस्ट की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और आगामी वित्त वर्ष 2025-26 के बजट को भी अंतिम रूप दिया गया।
मंदिर की आय में हुआ उल्लेखनीय इज़ाफा
ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति भी इस नेक पहल को सहयोग देने के लिए पूरी तरह सक्षम है। जहां वर्ष 2024-25 के लिए अनुमानित आय ₹114 करोड़ थी, वहीं अब यह बढ़कर ₹133 करोड़ तक पहुंच गई है। ट्रस्ट ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए ₹154 करोड़ का राजस्व लक्ष्य तय किया है।
यह बढ़ती आय मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान, नारियल, लड्डू आदि की बिक्री से प्राप्त हुई है। ट्रस्ट का कहना है कि यही धनराशि सामाजिक कल्याण के कार्यों में लगाई जाती है — और यह योजना उसी का हिस्सा है।
"वीआईपी कल्चर नहीं, सभी भक्त समान" — ट्रस्ट का बयान
मंदिर में वीआईपी संस्कृति को लेकर उठते सवालों पर ट्रस्ट कमेटी के सदस्य राहुल लोंढे ने स्पष्ट किया कि सिद्धिविनायक मंदिर में सभी भक्त एक समान हैं। विशेष आवश्यकता होने पर ही किसी भक्त को वीआईपी लाइन से अंदर ले जाया जाता है, वरना सभी को सामान्य व्यवस्था में ही दर्शन की सुविधा दी जाती है।