गोड्डा
गोड्डा में अडानी के खिलाफ रैयतों का आंदोलन अब उफान पर है। शनिवार को पोड़ैयाहाट विधायक और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भूख हड़ताल पर बैठे रैयतों के समर्थन में धरना स्थल पर आज पुनः पहुंचकर अडानी की मनमानी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। उन्होंने साफ और सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अगर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती तक अडानी ने तीसरी पार्टी आउटसोर्सिंग कंपनी इनोव से निकाले गए सभी कर्मियों को अपनी कोर कंपनी में नौकरी नहीं दी, तो वह अडानी के कोयले को गोड्डा में अंदर जाने से रोक देंगे। यह अल्टीमेटम अब इस आंदोलन को नया आयाम देने जा रहा है। इस बीच प्रदीप यादव ने दावा कि अडानी मामले में राहुल गांधी ने सीएम हेमंत सोरेन से बात की है।
प्रदीप यादव ने धरनास्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए जोश भरा। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई अब सिर्फ आपकी नहीं, हर उस शोषित की है जो अडानी जैसे पूंजीपतियों की तानाशाही से त्रस्त है। कई लोग आपको बरगलाने, फुसलाने और तोड़ने की कोशिश करेंगे। 'फूट डालो, राज करो' की चाल चली जाएगी, लेकिन आपको इन लोमड़ी चालों में फंसना नहीं है। सूझबूझ से लड़ना है, एकजुट रहना है और अपना हक छीनना है।" उन्होंने आगे कहा, "आपने जो आंदोलन की चिंगारी जलाई है, वह अब मशाल बनकर दूर तक पहुंचेगी। अडानी की मनमानी अब और नहीं चलेगी!"
धरनास्थल पर बिगड़ी आंदोलनकारी की हालत, मचा हड़कंप
इसी बीच धरनास्थल पर एक बड़ा हादसा टल गया। भूख हड़ताल पर बैठे एक आंदोलनकारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत सदर अस्पताल भेजा गया। यह घटना उस वक्त हुई जब प्रदीप यादव धरने पर मौजूद थे। आंदोलनकारियों में आक्रोश और बढ़ गया और अडानी के खिलाफ नारेबाजी तेज हो गई। इस घटना ने आंदोलन को और गंभीर मोड़ दे दिया है, क्योंकि रैयत अब अपने हक के लिए जान की बाज़ी लगाने को तैयार दिख रहे हैं।
प्रदीप यादव ने इस मौके पर आंदोलनकारियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, "आपके बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। यह लड़ाई अब सिर्फ नौकरी की नहीं, सम्मान और इंसाफ की है।" उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस आंदोलन की गूंज कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी तक पहुंच चुकी है। राहुल गांधी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से रैयतों की जायज मांगों को लेकर बात की है और इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। यादव ने भरोसा दिलाया, "आपका हक आपको मिलकर रहेगा। भले इसमें थोड़ी देर हो, लेकिन अंधेर नहीं होगा। अडानी को मजबूरन झुकना पड़ेगा।"
आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर
गोड्डा में अडानी के खिलाफ यह आंदोलन अब सिर्फ रैयतों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़े जनांदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रदीप यादव की आक्रामक रणनीति और बाबा साहेब की जयंती तक का अल्टीमेटम अडानी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे पीछे नहीं हटेंगे, चाहे उन्हें कितनी भी कीमत चुकानी पड़े। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अडानी इस अल्टीमेटम का क्या जवाब देता है और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। गोड्डा की यह जंग अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन चुकी है।