कोलकाता
10 लाख रुपए इनामी महिला माओवादी कमांडर पुष्पा उर्फ शकुंतला ने कल बुधवार की सुबह कोलकत्ता लालबजार में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। दो दशकों से अधिक समय तक हथियारों के बल पर सरकार के खिलाफ लड़ाई में लगे रहने के बाद, उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। अधिकारियों के समक्ष अपना हथियार सौंपते हुए शकुंतला ने कहा कि अब इस आंदोलन की कोई प्रासंगिकता नहीं रह गई है, और उन्होंने अन्य माओवादियों से भी हथियार डालकर सामान्य जीवन जीने की अपील की है।
पुष्प ने अपनी पूरी जीवनी बताई
जानकारी के मुताबिक, सारंडा जंगल के क्षेत्र में कभी आतंक का पर्याय मानी जाने वाली पुष्पा, कई माओवादी अभियानों की प्रमुख रणनीतिकार रही है। आत्मसमर्पण के बाद पूर्व माओवादी नेता ने कहा, "मुझे अब विश्वास नहीं है कि मौजूदा स्थिति में सशस्त्र आंदोलन प्रासंगिक है। मुझे लगता है कि आज के हालात में यह आंदोलन अब उचित नहीं है, इसीलिए मैंने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया। पुष्पा, जिन्हें 'शकुंतला' के नाम से भी जाना जाता है, पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी पीएलजीए की सदस्य थीं। उन पर 10 लाख रुपये का इनाम था और वे झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों में सक्रिय थीं। उन्होंने आगे कहा, सरकार की मुख्यधारा में लौटने की अपील ने मुझे एक नई उम्मीद दी है। अब मैं आम लोगों की तरह एक सामान्य पारिवारिक जीवन जीना चाहती हूं।
हथियार डालने और समाज में लौटने की अपील
शकुंतला ने वन क्षेत्रों में सक्रिय अन्य माओवादी कार्यकर्ताओं से भी हथियार डालने और समाज में लौटने की अपील की। उन्होंने उनसे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में जीवन का एक नया अध्याय शुरू करने का आग्रह किया। बताया जाता है कि वह साल 2001 से माओवादी आंदोलन से जुड़ी हुई थीं और पूरे क्षेत्र में संगठनात्मक और विद्रोही गतिविधियों में शामिल थीं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि उनके इस फैसले से अन्य माओवादी सदस्यों को भी हिंसा छोड़ने और सरकार द्वारा दिए जा रहे पुनर्वास के अवसरों का लाभ उठाने की प्रेरणा मिलेगी।