पटना
बिहार में नीतीश कुमार की सरकार ने 1 लाख 20 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया है। इसे बिहार में अब तक की सबसे बड़ी बहाली बताया गया है। सत्ता पक्ष में इस बात को लेकर उत्साह है कि बिहार ने नौकरी देने के मामले में कीर्तिमान रच दिया है। इस कीर्तिमान से पूरे देश की नजर बिहार पर टिक गयी है। जानकार साल 2023 को बिहार के लिए शिक्षक नियुक्ति वर्ष बता रहे हैं। बता दें कि बिहार में इसी साल पहले चरण में 1 लाख 75 हजार शिक्षकों की बहाली के लिए विज्ञापन निकाले गये थे। इसमें 8 लाख से अधिक लोगों ने आवेदन जमा किये। इस बीच सरकार ने अब तक चल रहे नियुक्ति का प्रावधान बदल दिया। पहली बार बीपीएससी को शिक्षक बहाली का जिम्मा दिया गया। इसी के तहत पहले चरण में 1 लाख 20 हजार शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिया गया।

बीपीएससी से पहली बार हुई शिक्षकों की बहाली
गौरतलब है कि अभी दूसरे चरण की बहाली भी होनी है। इसमें भी हजारों की संख्या में शिक्षक बहाली का अनुमान है। बहाल शिक्षकों में बिहार के साथ दूसरे राज्यों के भी लोग शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार बदली हुई व्यवस्था में पहले चरण के लिए देशभर से 8 लाख प्रतिभागियों ने आवेदन भेजे। दूसरे राज्यों से 3 लाख 12 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। दूसरे शब्दों में अन्य राज्यों के लगभग 40 फीसदी आवेदकों ने शिक्षक बहाली के लिए फॉर्म भरा था। बीपीएससी की ओर से परीक्षा लिये जाने के बाद इनमें से 1 लाख 20 हजार 336 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया।

तारीफ के साथ आलोचना भी हो रही है
हालांकि बिहार में दूसरे राज्यों के लोगों को नौकरी देने की आलोचना भी हो रही है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि बिहार सरकार नई नियुक्तियों के नाम पर पुरानी नियुक्तियों को ही दोहरा रही है। यानी पहले से काम कर रहे शिक्षकों को अपग्रेड कर, उनको नई नियुक्ति की श्रेणी में गिना जा रहा है। इस मामले में जन सुराज के मुखिया प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को चैलेंज करते हुए एक बड़ी बात कही है। किशोर ने कहा है कि ये नियुक्तियां नए लोगों के लिए नहीं हैं। पहले से नियोजित शिक्षकों को ही सीएम नीतीश नियुक्ति पत्र सौंप रहे हैं। कहा कि 1 लाख 20 हजार में मुश्किल से 20-25 हजार नये लोगों को नौकरी मिलने वाली है। उन्होंने नीतीश से सीधा सवाल पूछा है कि इनमें से कितने लोग ऐसे हैं, जो पहले से नियोजित नहीं हैं या जो पहले से नौकरी में नहीं है। साथ ही उन्होंने ये भी पूछा है कि इन 20-25 हजार नये लोगों में भी कितने लोग बिहार के मूल निवासी हैं।
