द फॉलोअप, रांची
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर कहा है कि सरकार ने धोखा किया है। शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना से वह दुखी हैं। उन्होंने इसे “तानाशाही और युवा विरोधी सरकार” का रवैया बताया। चंपाई सोरेन ने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद यह सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक है। राज्य के कोने-कोने से छात्र अनुशासन के साथ आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की प्रमुख मांग थी कि नियुक्तियों में हुई गड़बड़ियों की CBI जांच कराई जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार करीब सात साल तक सत्ता में रही, लेकिन एक भी ऐसी पारदर्शी नियुक्ति नहीं करा पाई, जिस पर सवाल न उठे। चंपाई सोरेन ने कहा कि सरकार ने नियुक्तियों को लेकर फैसला लेने में भी “चालाकी” की। उनके मुताबिक, जिस दिन नियुक्तियां रद्द करने की घोषणा हुई, कैबिनेट में करीब चार घंटे तक चर्चा चली और उससे पहले JPSC के चेयरमैन व सदस्यों के इस्तीफे ले लिए गए।

दस्तावेज और रिकार्ड्स की सुरक्षा महत्वपूर्ण
पूर्व मुख्यमंत्री ने JPSC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी नियुक्ति सरकार करती है। उन्होंने कहा कि CID जांच में गंभीर साक्ष्य सामने आने और पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते के जेल जाने के बावजूद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल बने हुए हैं। चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि “केस को कमजोर करने और तथ्य छिपाने के लिए सरकार की नीयत में खोट है।” उन्होंने कहा कि JPSC के एक सदस्य के PA की गिरफ्तारी हुई, लेकिन संबंधित सदस्य के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नियुक्तियां रद्द होने की घोषणा के बाद छात्रों ने राहत की उम्मीद की थी, लेकिन कोर्ट से तत्काल स्टे मिल गया। चंपाई सोरेन के मुताबिक, सरकार द्वारा JPSC के चेयरमैन और सदस्यों से इस्तीफा लिए जाने के बाद अब महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया गलत
24 जिलों में छात्रों द्वारा पुतला दहन के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र किसी राजनीतिक दल का झंडा लेकर आंदोलन नहीं कर रहे थे, तो उनके साथ इतना सख्त व्यवहार क्यों किया गया। उन्होंने सत्ता पक्ष के उन नेताओं के आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें आंदोलन को भाजपा से जोड़ने की बात कही जा रही है। चंपाई सोरेन ने कहा कि यह राजनीतिक आंदोलन नहीं था और छात्र किसी पार्टी का झंडा लेकर नहीं चल रहे थे।
JMM पर भी लगाए गंभीर आरोप
चंपाई सोरेन ने छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर झामुमो पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “JMM के आदेश के बिना कोई ऐसा नहीं करेगा” और दावा किया कि पार्टी नेतृत्व के आदेश के बाद ही JMM कार्यकर्ताओं ने छात्रों पर लाठी बरसाई। उन्होंने कहा कि सरकार को कोर्ट में नियुक्तियों से जुड़े पूरे मामले को मजबूती से रखना चाहिए और सभी तथ्यों के साथ न्यायालय का सामना करना चाहिए। लेकिन उनका आरोप है कि सरकार की मंशा ही मामले की पूरी जांच कराने की नहीं है। चंपाई सोरेन ने नियुक्तियों में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों के चयन का भी मुद्दा उठाया और कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि झारखंड की नौकरियों में दूसरे राज्यों के करीब 150 अभ्यर्थियों के चयन की बात सामने आ रही है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और नियुक्तियों में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
