द फॉलोअप डेस्क
आज सुबह 11:46 बजे अचानक देशभर में लोगों के मोबाइल फोन एक साथ तेज आवाज में बजने लगे, जिससे कुछ देर के लिए अजीब सा माहौल बन गया। करीब एक मिनट तक अलार्म बजता रहा और इसके साथ एक मैसेज भी स्क्रीन पर फ्लैश हुआ, जिसमें बताया गया कि यह भारत सरकार द्वारा आपदा अलर्ट सिस्टम का परीक्षण है। अलार्म अपने आप बंद हो गया, लेकिन इस दौरान कई लोग हैरान रह गए। दरअसल यह मैसेज राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, यानी NDMA ने भेजा था, जो इमरजेंसी मोबाइल अलर्ट ट्रायल का हिस्सा है। NDMA ने इमरजेंसी में लोगों तक सूचना पहुंचाने के लिए 2 मई को सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का परीक्षण किया था। NDMA ने मोबाइल SMS को सेल ब्रॉडकास्ट (CB) तकनीक से जोड़ा है। इससे चुने गए इलाके में एक्टिव सभी मोबाइल फोन पर एक साथ अलर्ट मिलेगा। इससे इमरजेंसी के समय रियल टाइम सूचना पहुंच सकेगी।

सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम का हुआ परीक्षण
यह अलर्ट भारत सरकार की ओर से शुरू की गई सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य आपदा के समय लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाना है। इस दौरान फोन पर एक मैसेज भी आया, जिसमें साफ लिखा था कि यह सिर्फ एक टेस्ट मैसेज है और इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। शनिवार को देश के सभी राज्यों की राजधानियों और दिल्ली-NCR में सभी मोबाइल फोन पर एकसाथ टेस्टिंग मैसेज भेजा गया। यह मैसेज हिंदी और अंग्रेजी के साथ सभी क्षेत्रीय भाषाओं में भी भेजा गया। इस मैसेज में लोगों को बताया गया कि यह केवल परीक्षण है और इस पर कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं है। सरकार ने दो दिन पहले ही मैसेज भेजकर लोगों से अपील की थी कि टेस्टिंग वाला मैसेज मिलने पर घबराएं नहीं। शनिवार का मैसेज केवल इमरजेंसी के हालात में चेतावनी देने वाले सिस्टम की जांच के लिए भेजा गया था।

AI वॉयस के साथ आया मैसेज, लोग हुए चौंक गए
अलर्ट के साथ मोबाइल फोन में एआई आधारित वॉयस मैसेज भी सुनाई दिया, जिसने लोगों का ध्यान खींचा। हालांकि सरकार ने पहले ही इस टेस्ट के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन जिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी, वे अचानक फोन बजने से कुछ देर के लिए घबरा गए और एक-दूसरे से पूछने लगे कि आखिर यह क्या हो रहा है। इमरजेंसी की स्थिति में लोगों को रियल टाइम अलर्ट देने के लिए सरकारी संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) ने इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम 'SACHET’ को विकसित किया है। सचेत नाम का यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है। इसे देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक्टिव कर दिया गया है।