द फॉलोअप डेस्क
चीन सरकार ने दावा किया है कि उसके इंजीनियरों ने राफेल को मार गिराने वाले पाकिस्तानी जेट्स को गाइड किया था। मिली रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी इंजीनियरों ने पाकिस्तान वायु सेना के साथ एक एयरबेस पर काम किया, और चीन में बने J-10CE जेट्स को गाइड करने में मदद की। बता दें कि पिछले मई में चार दिन चले युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना के एक राफेल लड़ाकू विमान को मार गिराया था। हालांकि इसे लेकर भारतीय सेना के अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं।
चेंगदू एयरक्राफ्ट डिज़ाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इंजीनियर, झांग हेंग ने चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर को बताया कि ऑन साइट टीम यह पक्का करना चाहती थी कि उनके उपकरण "सचमुच अपनी पूरी युद्ध क्षमता के साथ काम कर सकें"। चीनी पक्ष साफ तौर पर इस बात से खुश था कि उनके जेट्स ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया और राफेल जैसे उच्च श्रेणी के फ्रांसीसी लड़ाकू विमान को मार गिराने में सफल रहे, जो दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक है।

राफेल का पहला अधिकारिक नुकसान होगा
अगर यह सच है, तो यह राफेल का पहला अधिकारिक नुकसान होगा। भारत ने नुकसान की बात तो मानी है, लेकिन कभी भी क्षति की पुष्टि नहीं की है। पाक को चीनी मदद की बात, जिसकी पुष्टि पहली बार चीनी सरकारी मीडिया ने सार्वजनिक रूप से की है, इस बात को रेखांकित करती है कि बीजिंग ने पाकिस्तान को किस स्तर तक समर्थन दिया था। इससे जाहिर है कि इस्लामाबाद की चीन पर सैन्य निर्भरता कितनी बढ़ गई है।

पाकिस्तान को लगभग 80 प्रतिशत हथियार चीन से मिला
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2021 और 2025 के बीच पाकिस्तान के लगभग 80 प्रतिशत हथियार का आयात चीन से हुआ। J-10CE के साथ-साथ, पाकिस्तान वायु सेना JF-17 लड़ाकू विमान पर भी काफी हद तक निर्भर है, जिसे बीजिंग और इस्लामाबाद ने मिलकर विकसित किया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पास 36 J-10CE लड़ाकू विमान हैं, जो चीन के J-10C के उन्नत संस्करण हैं। ये जेट्स AESA रडार सिस्टम से लैस हैं और लंबी दूरी की PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागने में सक्षम हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उसने भारतीय वायु सेना के 5 विमानों को मार गिराया था, हालांकि भारत ने इन डेटा की पुष्टि की है।
