द फॉलोअप डेस्क
देश भर में चल रहे ट्रेंड के अनुरूप, असम में पर्यावरण से जुड़े अपराधों की संख्या में काफी कमी देखी गई है। केंद्र सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2024 में राज्य में पर्यावरण से जुड़े अपराधों के केवल 37 मामले दर्ज किए गए। असम में हुई ऐसी कुल घटनाओं में से 16 मामले 'वन अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम, 1927' के तहत, 18 मामले 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972' के तहत और तीन मामले 'सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003' के तहत दर्ज किए गए।
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क्या कहते हैं NCRB के आंकड़े
हालांकि, उस साल राज्य में 'पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986' या हवा और पानी के प्रदूषण से जुड़े कानूनों के तहत कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पर्यावरण से जुड़े अपराधों में आई कमी को वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में चलाए जा रहे सघन अभियान का परिणाम माना जा रहा है। राज्य सरकार और वन विभाग ने हाल के वर्षों में अवैध कटाई, वन्यजीव तस्करी तथा संरक्षित क्षेत्रों में अतिक्रमण के खिलाफ निगरानी बढ़ाई है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी से संरक्षण कार्यक्रमों को भी मजबूती मिली है।

संरक्षण प्रयासों के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि असम जैसे जैव विविधता से समृद्ध राज्य में पर्यावरण अपराधों में कमी संरक्षण प्रयासों के लिए सकारात्मक संकेत है। राज्य में स्थित प्रमुख संरक्षित क्षेत्र, जिनमें Kaziranga National Park, Manas National Park और अन्य वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं, दुर्लभ वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्यावरण संरक्षण से पर्यटन, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
