द फॉलोअप नेशनल डेस्क
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों घोषणा कर दी है कि 2021 से लंबित जनगणना बहुत जल्द शुरू होगी। साथ ही उन्होंने जाति जनगणना कराने के बारे मे कहा कि इस संबंध में सरकार के फैसले को जनगणना की घोषणा के समय सार्वजनिक किया जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार जाति जनगणना कराएगी, जो विपक्ष की एक प्रमुख मांग है, तो शाह ने इस संभावना से इनकार नहीं किया। सरकार जाति जनगणना कराकर विपक्ष को अचंभित कर सकती है। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि जाति जनगणना का क्रेडिट बीजेपी ले पाएगी या नहीं। जानकारों के मुताबिक इसमें संदेह है क्योंकि जातीय जनगणना को लेकर विपक्ष लंबे समय से मांग उठाता रहा है।
वहीं, बिहार में एनडीए में शामिल नीतीश कुमार पहले ही जातीय जनगणना कराकर इसका श्रेय ले चुके हैं। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार भी जातीय जनगणना को लेकर गंभीर है औऱ इस बारे में कई बार सकारात्मक घोषणाएं कर चुकी है। इधर, कांग्रेस ने CWC में प्रस्ताव पारित कर ऐलान किया था कि केंद्र की सत्ता में आने पर वो देश भर में जातिगत जनगणना कराएगी। यही नहीं लोकसभा चुनावों के मेनिफेस्टो में भी कांग्रेस की तरफ से ये वादा किया गया था कि सरकार बनी तो बिहार की ही तरह जातिगत गणना करायी जाएगी।
जानकारों के मुताबिक लोकसभा चुनावों में बीजेपी को अपेक्षित सफलता न मिलने के कारणों में से एक यह रहा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी को ओबीसी और दलित वोटों का हिस्सा कम हो गया था। 2014 और 2019 के चुनावों में पार्टी को मिले भारी बहुमत के पीछे इन दोनों ही समुदायों के वोटों की बड़ी भूमिका रही थी। वहीं, 2024 में संविधान बदलने के दुष्प्रचार ने पार्टी का बहुत नुकसान किया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक बीजेपी इस नुकसान को जातीय जनगणना कराकर पाटना चाहती है।