द फॉलोअप डेस्क
वोटर लिस्ट (Voter List) में नाम जोड़ने के लिए अब माता-पिता के बारे में जानकारी नहीं देनी होगा। चुनाव आयोग (Election Commission) ने उन राज्यों में ऑनलाइन वोटर एनरोलमेंट (Voter Enrollment) फॉर्म 6 से SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा (Declaration) को हटा दिया है, जहां वोटर लिस्ट (Voter List) का स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न पूरा हो चुका है। यह कदम पूरे आयोग के उस फ़ैसले के कुछ दिनों बाद उठाया गया है जिसमें कहा गया था कि यह ज़रूरत सिर्फ़ SIR प्रक्रिया के दौरान ही लागू होगी। बुधवार को पोर्टल (Portal) से यह घोषणा हटा दी गई। यह घोषणा, जिसमें नए आवेदकों (Applicants) को खुद को या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पहले हुए इंटेंसिव रिविज़न के दौरान तैयार वोटर लिस्ट से जोड़ने वाली जानकारी देनी होती थी, उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ECINET पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी जहां SIR अभी चल रहा है।

पोर्टलों से भी अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई है
जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहाँ ECINET ऐप और पोर्टल के साथ-साथ संबंधित मुख्य चुनाव अधिकारी के पोर्टलों से भी अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई है। अब एनरोलमेंट चाहने वाले आवेदकों को केवल 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय कानूनी फॉर्म 6 भरना होगा। यह कदम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी वाले पूरे आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद उठाया गया है। बैठक के बाद, चुनाव आयोग ने कहा था कि फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा SIR के लिए थी और "गैर-SIR अवधि के लिए, नियमों (रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स 1960) के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा"। यह मामला तब विवाद का विषय बन गया था जब यह पता चला कि संधू और जोशी ने फॉर्म 6 से जुड़े बदलावों पर आपत्ति जताई थी।

जोशी ने फॉर्म में बदलावों पर इस आधार पर आपत्ति जताई थी
फॉर्म 6 वह कानूनी फॉर्म है जिसका इस्तेमाल योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए आवेदन करने के लिए करते हैं। जोशी ने फॉर्म में बदलावों पर इस आधार पर आपत्ति जताई थी कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता। संधू भी उनसे सहमत थे। ECINET पर ऑनलाइन फॉर्म 6 प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा को शामिल किए जाने के बाद, संधू ने फिर से आपत्ति जताई और इस बदलाव को "अनधिकृत/गैर-कानूनी" बताते हुए इसे हटाने की मांग की। हालांकि, अपने सार्वजनिक बयानों में चुनाव आयोग (EC) ने कहा है कि फ़ॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और घोषणा (डिक्लेरेशन) SIR से जुड़ी एक अतिरिक्त ज़रूरत थी। आयोग ने यह भी कहा है कि बिहार SIR पर अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस घोषणा को सही ठहराया था।
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