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पेसा पर किसी भी ग्राम प्रधान ने क्यों नहीं कुछ बोला, केवल बीजेपी के लोगों को तकलीफ हैः सुप्रियो

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द फॉलोअप डेस्क
झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि पेसा नियमावली बना कर हेमंत सोरेन की सरकार ने ग्रामीणों को शोषण और दोहन से मुक्ति दिलाने का काम किया है। इससे भाजपा की आदिवासी विरोधी राजनीति नेस्तनाबूत हो गयी है। नियमावली बनने से वनोपज लूटने और बालू-गिट्टी के माफिया तत्वों का आर्थिक मेरुदंड कमजोर होनेवाला है, जिसका भाजपा प्रतिनिधित्व करती है। इन्हें अब घोर मुसीबत का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली पर भाजपा के महान लोग बोल रहे हैं, जो केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्री रहे, तीन बार मुख्यमंत्री रहे और अपने कार्यकाल में पेसा पर पांच पैसा का काम करने के बदले केवल अपनी जाति पातर मुंडा को एसटी सूची में शामिल कराने का काम किए। सुप्रियो आज पार्टी मुख्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि पेसा नियमावली पर आज कोई भी मांझी, मानकी, मुंडा, डोकलो, सोहोर जैसे ग्राम प्रधान क्यों नहीं बोल रहे। केवल भाजपा के ही पेट में दर्द क्यों हो रहा है।


उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र में टीएसी का चेयरमैन गैर आदिवासी रहा, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के कार्यकाल में डोमेसाइल का नंगा नाच किया गया। तपकरा कांड हुआ। आदिवासियों पर गोली चलवायी गयी। सुप्रियो ने कहा कि इन्हें छत्तीसगढ़, उड़ीसा जैसे भाजपा शासित राज्यों में क्या प्रावधान है, इसे बताना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब ग्राम सभा अपनी नीतियां बनाएगी। कोई दबाव डाल कर माइनिंग लीज नहीं ले सकेगा। जंगल काटने और केंदू पत्ता लूटनेवालों माफियागिरी समाप्त होगी। हेमंत सोरेन ने पेसा नियमावली बना कर अब शोषण मुक्त गांव बनाने का काम किया है। अब 10 किलो महुआ के बदले एक किलो सरसो तेल और पांच केजी मड़ुआ के  बदले एक किलो चीनी देकर शोषण की परंपरा समाप्त होनेवाली है। अखिल भारतीय सेवा की अधिकारी निशा उरांव के बयान पर उन्होंने कहा कि यह ऑफिशियल सेक्रेट एक्ट का मामला है। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।


सीजीएल पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भाजपा के गाल पर तमाचा
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि सीजीएल परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय भाजपा के बुद्धिजीवी मंच के गाल पर तमाचा है। अब भाजपा के सभी राजनीतिक हथकंडे वर्ष 2026 में समाप्त हो गए हैं।

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