द फॉलोअप डेस्क
रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर सियासत तेज हो गई है। नगर सरकार में मेयर के बाद इस पद को काफी अहम माना जाता है, ऐसे में सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। 19 मार्च को पार्षदों के शपथ ग्रहण और नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इस पद पर कौन काबिज होगा। पिछले करीब दो हफ्तों से भाजपा और कांग्रेस के बीच इस पद को लेकर अंदरखाने जोरदार खींचतान चल रही है, लेकिन दोनों ही पार्टियां अब तक अपने उम्मीदवार के नाम पर अंतिम सहमति नहीं बना पाई हैं।
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कांग्रेस की ओर से इस चुनाव की रणनीति की जिम्मेदारी पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की संभाल रहे हैं। कई दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी किसी एक चेहरे पर मुहर लगाने में सफल नहीं हो सकी है। वहीं भाजपा खेमे में भी लगातार मंथन जारी है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रांची विधायक सीपी सिंह और हटिया विधायक नवीन जायसवाल की मौजूदगी में कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन देर रात तक भी उम्मीदवार के नाम पर सहमति नहीं बन पाई।

इधर, 21 पार्षदों के रांची से बाहर होने की खबर ने राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि ये सभी पार्षद फिलहाल संपर्क से बाहर हैं और सीधे मतदान के दिन ही समाहरणालय पहुंचेंगे। इसे संभावित दल-बदल या क्रॉस वोटिंग को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। संख्या बल की बात करें तो भाजपा अपने 17 पार्षदों के समर्थन का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस 18 से 20 पार्षदों के साथ होने की बात कह रही है। इसके अलावा झामुमो के 5, राजद के 3 से 4 पार्षद और कई निर्दलीय सदस्य भी हैं। ऐसे में इस चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, जो नतीजे को किसी भी दिशा में मोड़ सकते हैं।