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ट्रेजरी घोटाला : मुनिंद्र जहां जहां पदस्थापित रहा, फर्जी निकासी किया

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द फॉलोअप, रांची
इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन (IAHP) के लेखापाल मुनिंद्र कुमार जहां जहां भी पदस्थापित रहा, अवैध निकासी में शामिल रहा। सीआईडी की जांच में यह तथ्य सामने आया है। सीआईडी की पूछताछ में मुनिंद्र ने भी इसे स्वीकारा है। सूत्रों के अनुसार रांची से पहले मुनिंद्र कुमार रामगढ़ में पदस्थापित था। वहां भी वेतन मद में वह लगभग 30-35 लाख रुपए की अवैध निकासी की। सीआईडी की टीम रामगढ़ के अलावा उसके पदस्थापना वाले जिले की भी जांच कर रहा है। मालूम हो कि IAHP में हुए घोटाले के बारे में रांची कोषागार द्वारा उपायुक्त को दी गयी सूचना के आधार पर डीसी ने एफआईआर करने का आदेश दिया था। जिसके बाद कार्यपालक दंडाधिकारी मो जफर हसनात ने कोतवाली थाने में मुनिंद्र और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। उसमें वेतन मद से लगभग 3.35 करोड़ रुपए की फर्जी निकासी का आरोप है। हालांकि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल के नेतृत्ववाली टीम ने अब तक रांची ट्रेजरी घोटाले की जांच शुरू नहीं की है। इस कमेटी द्वारा जांच की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कई और रहस्य और तथ्यों के सामने आने की संभावना है।


इधर सूत्रों के अनुसार अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली जांच टीम एक बार फिर बोकारो जाएगी। पिछले दिनों यह जांच टीम बोकारो गयी थी। वहां डीसी, एसपी, कोषागार पदाधिकारी व जिले के अन्य वरीय अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बोकारो से जांच टीम ने दस्तावेजों का पुलिंदा भी लाया था। इसकी प्रतिदिन परीक्षण किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दस्तावेजों की जांच के क्रम में उभर रहे बिंदुओं पर जिले के संबंधित अधिकारियों का पक्ष लेने और समझने के लिए जांच टीम बोकारो जाएगी। उसके बाद यह स्पष्ट हो सकेगा किस अधिकारी की ट्रेजरी से अवैध निकासी में कितनी संलिप्तता रही है। सूत्रों का कहना है कि बोकारो की जांच प्रक्रिया के अंतिम मुकाम पर पहुंचने के बाद हजारीबाग और अन्य जिलों में हुए ट्रेजरी घोटाले को टेकअप किया जाएगा।

Tags - Jharkhand treasury scam animal husbandry Munindra investigation