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रांची में मानव तस्करी और तस्करी नेटवर्क पर अमेरिका-भारत की संयुक्त चर्चा

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द फॉलोअप डेस्क
मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत बनाने के उद्देश्य से रांची में “यू.एस.–इंडिया कोऑपरेशन टू काउंटर ट्रैफिकिंग थ्रैट्स” विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, कोलकाता ने किया। सम्मेलन में सरकार, नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और शिक्षाविदों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने इस बात पर चर्चा की कि भारत और अमेरिका को नुकसान पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्कों को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग कितना जरूरी है। सम्मेलन का उद्घाटन अमेरिकी महावाणिज्यदूत कैथी गाइल्स-डियाज़ ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तस्करी नेटवर्क समाज और समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं और सबसे कमजोर लोगों का शोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिकी विदेश नीति का स्पष्ट लक्ष्य अमेरिका को अधिक सुरक्षित बनाना है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों को उनके स्रोत पर ही रोकना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की चुनौतियों से कोई देश अकेले नहीं निपट सकता और अमेरिका भारत के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।


विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक जांच और निगरानी मॉडल
सम्मेलन में कानून प्रवर्तन एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े अमेरिका और भारत के कई विशेषज्ञ शामिल हुए। विशेषज्ञों ने उन्नत जांच मॉडल, डेटा आधारित सीमा निगरानी तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के बेहतर तरीकों पर अपने अनुभव साझा किए। चर्चा के दौरान सूचना साझा करने की व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा तस्करी की पहचान और रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही अमेरिका और भारत के बीच सहयोग के व्यावहारिक तंत्र विकसित करने पर भी विचार किया गया।


तस्करी नेटवर्कों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी
सम्मेलन में यह भी बताया गया कि ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी सीमाओं और समुदायों के लिए खतरा बनने वाले तस्करी नेटवर्कों के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं। सौ से अधिक ऑनलाइन धोखाधड़ी संचालकों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिनमें से कई बंधुआ श्रम का इस्तेमाल कर दुनिया भर के लोगों से अरबों डॉलर की ठगी कर रहे थे। इसके अलावा, मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के अभियान के तहत अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने लगभग 20 लाख किलोग्राम अवैध ड्रग्स और गोलियां जब्त की हैं। अधिकारियों के अनुसार इन कार्रवाइयों से आपराधिक नेटवर्कों के अरबों डॉलर के मुनाफे पर रोक लगी है। सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अमेरिका और भारत दोनों ही तस्करों को कानून के दायरे में लाने और उनके निशाने पर आने वाले कमजोर लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं।

 

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