द फ़ॉलोअप्म डेस्क, रांची:
परिसीमन के प्रस्ताव के विरोध में 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता मार्च आयोजित किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से आदिवासी और एससी समुदाय के लिए आरक्षित सीटों पर असर पड़ने की आशंका है।
अजय तिर्की ने कहा कि झारखंड राज्य जिस उद्देश्य और अधिकारों के लिए बिहार से अलग हुआ था, वह उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब आदिवासी और मूलवासी समाज के प्रतिनिधि विधानसभा और लोकसभा में मजबूत रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि प्रतिनिधित्व कम हुआ तो आदिवासी समाज के हक, अधिकार, भाषा, संस्कृति, सभ्यता और संरक्षण की आवाज कमजोर हो जाएगी।

रैली में 24 जिलों से लोग शामिल होंगे
उन्होंने बताया कि 30 अगस्त की रैली में झारखंड के सभी 24 जिलों से लोग शामिल होंगे। उन्होंने इसे आंदोलन की शुरुआत बताते हुए कहा कि जब तक आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सीटों को सुरक्षित एवं संरक्षित नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अजय तिर्की ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर दिल्ली तक आंदोलन ले जाने की बात कही।

परिसीमन में आदिवासी और एससी सीटें घटने की आशंका
परिसीमन बिल में सीटें बढ़ाने की बात पर सवाल पूछे जाने पर अजय तिर्की ने कहा कि केवल सीटें बढ़ना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने पर आदिवासी और एससी समुदाय की सीटें घटने की आशंका है, इसलिए पहले से उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने इसकी तुलना अस्पताल और भोजन की व्यवस्था से करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने के बाद व्यवस्था करने के बजाय पहले से तैयारी जरूरी है।